डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया जाना उनके सपनों और संकल्पों को सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और विकास के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का उनका दृष्टिकोण आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है और उनके आदर्श विकसित भारत के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शक बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में डॉ. मुखर्जी को प्रखर राष्ट्रवादी, विद्वान शिक्षाविद, दूरदर्शी चिंतक और कुशल प्रशासक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्योग और राष्ट्रीय एकीकरण के क्षेत्र में डॉ. मुखर्जी का योगदान उल्लेखनीय रहा। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और उससे जुड़े विशेष प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय उस विचार को साकार करने वाला कदम था, जिसके लिए डॉ. मुखर्जी ने लंबे समय तक संघर्ष किया था। उन्होंने पूरे देश में एक समान संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता की वकालत की थी।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने कम आयु में ही शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और मात्र 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय सरकार में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में भी कार्य किया। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार माना जाता है। उनके राजनीतिक जीवन का सबसे प्रमुख मुद्दा जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष संवैधानिक दर्जे का विरोध था। उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देते हुए राष्ट्रीय एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
वर्ष 1953 में बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हिरासत के दौरान 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु को लेकर वर्षों तक राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा होती रही। भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठन लंबे समय से अनुच्छेद 370 को हटाने को डॉ. मुखर्जी के अधूरे संकल्प की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।
डॉ. मुखर्जी की जयंती पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भाजपा और उसके नेताओं ने उनके राष्ट्रवाद, जनसेवा, साहस और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी देश को सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। नेताओं ने विश्वास जताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान भारतीय राजनीति और राष्ट्र निर्माण के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।




