मोदी-प्रबोवो वार्ता का बड़ा असर, ब्रह्मोस मिसाइल और कृषि क्षेत्र में नए समझौते

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे ने भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्रदान की है। जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, कृषि, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग को नई गति दी जाएगी।

बैठक के बाद भारत और इंडोनेशिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों के आदान-प्रदान, अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और कृषि निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष सहमति बनी। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन और खाद्य आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास करने का भी निर्णय लिया। इसके अलावा समुद्री सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल नवाचार और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने पर भी दोनों पक्षों ने सकारात्मक सहमति व्यक्त की।

इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर रहा। भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली की खरीद को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई है और भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के साथ-साथ अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि अंतिम आपूर्ति से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं, लेकिन इसे भारत के रक्षा निर्यात और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस मिसाइल सहयोग केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला कदम है। इससे समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। दोनों देशों ने समुद्री निगरानी, नौवहन सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

वार्ता के दौरान व्यापार और निवेश को नई ऊंचाई देने, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में आर्थिक, सामरिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और व्यापक बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती देने के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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