हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करते हुए भारत ने नौसैनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) मुख्यालय, कोच्चि में 25 देशों के नौसैनिक अधिकारियों और कैडेटों की भागीदारी के साथ बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण पहल ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर सहयोग, सामूहिक क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को बढ़ावा देना है।
भारतीय नौसेना ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की उस बदलती भूमिका का प्रतीक है, जिसमें देश केवल विदेशी सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर रक्षा प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाले प्रमुख साझेदार के रूप में उभर रहा है। कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान को लंबे समय से भारतीय नौसेना का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है और अब यह मित्र देशों के अधिकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रशिक्षण हब बनता जा रहा है।
इस बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के 25 देशों के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। प्रशिक्षण के दौरान नौसैनिक नेतृत्व, समुद्री संचालन, खोज एवं बचाव (Search and Rescue), मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), समुद्री कानून, नौवहन, साइबर सुरक्षा तथा आधुनिक नौसैनिक रणनीतियों जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा समुद्र में व्यावहारिक अभ्यास और संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव भी मिलेगा।
भारतीय नौसेना का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में समुद्री सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, प्राकृतिक आपदाओं और समुद्री आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच समन्वय और साझा प्रशिक्षण आवश्यक है। ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ इसी सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल से भारत की ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) और ‘महासागर’ जैसी समुद्री रणनीतियों को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही यह भारत की रक्षा कूटनीति (Defence Diplomacy) को नई गति देगा और हिंद महासागर क्षेत्र में विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत करेगा।
कोच्चि में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के नौसैनिक अधिकारियों के बीच दीर्घकालिक पेशेवर संबंध विकसित करना, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना और भविष्य में संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर तालमेल स्थापित करना भी है। भारतीय नौसेना का मानना है कि साझा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक रक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, अनुभवी प्रशिक्षकों और उन्नत नौसैनिक क्षमताओं के दम पर भारत मित्र देशों के लिए पसंदीदा प्रशिक्षण गंतव्य बनता जा रहा है। ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ इसी दिशा में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।




