पश्चिम बंगाल में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया है। राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई में 1,279 मस्जिदों और 199 मंदिरों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह कदम उन धार्मिक स्थलों पर उठाया गया, जहां ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था या लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी एक समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं की गई, बल्कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से नियम लागू किए जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान कई धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से बातचीत की गई और उन्हें ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानूनों की जानकारी दी गई। कई स्थानों पर मंदिर और मस्जिद समितियों ने प्रशासन के निर्देशों को स्वीकार करते हुए खुद ही लाउडस्पीकर हटा लिए। वहीं, कुछ धार्मिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि लाउडस्पीकर हटाने से पहले स्पष्ट लिखित आदेश और एक समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि किसी तरह की गलतफहमी की स्थिति न बने।
राज्य में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू नियमों के तहत सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक उपकरणों के इस्तेमाल के लिए प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसके अलावा दिन और रात के समय के लिए ध्वनि की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध रहता है, जबकि अन्य समय में भी निर्धारित डेसीबल सीमा का पालन करना अनिवार्य है।
प्रशासन का कहना है कि बढ़ते शोर प्रदूषण का असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। तेज आवाज के कारण बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों में आस्था और परंपराओं का सम्मान किया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरण और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कानून का पालन भी जरूरी है।
इस कार्रवाई के बाद राज्य में ध्वनि प्रदूषण और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि आने वाले समय में भी नियमों का उल्लंघन करने वाले स्थानों पर कार्रवाई जारी रहेगी। सभी धार्मिक संस्थाओं से अपील की गई है कि वे आवश्यक अनुमति लेकर और निर्धारित मानकों के अनुसार ही ध्वनि उपकरणों का उपयोग करें।




