बोगोटा: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद बड़े मानवीय संकट से जूझ रहा है। 7.4 तीव्रता के इस भूकंप ने देश के पश्चिमी हिस्से को सबसे अधिक प्रभावित किया। कई जगह इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और कुछ ढह गईं, जबकि अस्पतालों, सड़कों और अन्य जरूरी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी सामने आई है। राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
भूकंप का केंद्र कोलंबिया के चोको विभाग में सैन जोसे डेल पालमार के आसपास बताया गया है। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के मुताबिक भूकंप काफी गहराई में आया, जबकि कोलंबिया की भूवैज्ञानिक सेवा ने इसे हाल के वर्षों में देश में दर्ज बेहद शक्तिशाली भूकंपों में शामिल किया है। इसके झटके राजधानी बोगोटा सहित देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए। पड़ोसी देशों इक्वाडोर, वेनेजुएला और पनामा में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। मुख्य भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिसके कारण प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस नहीं जाने की अपील की है।
पश्चिमी कोलंबिया के कई इलाकों में भूकंप से व्यापक नुकसान की खबर है। रिसाराल्दा विभाग के पेरेइरा और आसपास के क्षेत्रों में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। राहतकर्मियों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया। कैली में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर इसका असर पड़ा। मानिजालेस में एक ऐतिहासिक कैथेड्रल के हिस्से को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। कई स्थानों पर सड़कों और सार्वजनिक ढांचे के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत टीमों के सामने प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की चुनौती पैदा हुई।
भूकंप के बाद कोलंबिया की सेना, पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय आपदा प्रबंधन एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुट गई हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोग भी बचावकर्मियों के साथ मलबा हटाने में मदद कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता उन लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना है, जो ढही हुई इमारतों के नीचे फंसे हो सकते हैं। कुछ दूरदराज के इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन करने में समय लग रहा है। अस्पतालों पर घायलों का दबाव बढ़ने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को भी अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस प्राकृतिक आपदा के बाद दुनिया के कई देशों ने कोलंबिया के प्रति एकजुटता दिखाई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावित लोगों के साथ फ्रांस की एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में कोलंबिया फ्रांस के समर्थन पर भरोसा कर सकता है। मैक्रों की प्रतिक्रिया को यूरोप की ओर से कोलंबिया के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका ने भी कोलंबिया को सहायता का भरोसा दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन भूकंप की स्थिति पर नजर रख रहा है और कोलंबिया की सरकार तथा वहां के लोगों की मदद के लिए तैयार है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है। अमेरिका ने अपने नागरिकों से भी स्थानीय अधिकारियों और अमेरिकी दूतावास के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शेनबाम ने भी कोलंबिया के प्रति संवेदना व्यक्त की और जरूरत पड़ने पर सहायता देने की पेशकश की। मेक्सिको के विदेश मंत्रालय ने कोलंबियाई अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने की बात कही है। सरकार ने संकेत दिया कि यदि कोलंबिया की ओर से किसी विशेष सहायता की मांग की जाती है तो उसके अनुसार सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
पड़ोसी देश इक्वाडोर ने भी तत्काल सहायता की पेशकश की है। राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने प्रशिक्षित बचावकर्मियों, खोजी कुत्तों और जरूरी उपकरणों से लैस एक विशेष बचाव दल उपलब्ध कराने की बात कही। मलबे में दबे लोगों की तलाश में प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और विशेषज्ञ बचावकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। दोनों देशों की भौगोलिक निकटता के कारण इक्वाडोर से राहत दल को अपेक्षाकृत कम समय में प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा सकता है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी कोलंबिया में हुई तबाही पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ब्राजील जरूरत पड़ने पर कोलंबिया की सहायता करने के लिए तैयार है। इसी तरह वेनेजुएला ने भी अपने पड़ोसी देश को बचावकर्मी और मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की। वेनेजुएला के अधिकारियों ने कहा कि संकट की इस घड़ी में दोनों देशों के बीच सहयोग जरूरी है।
चिली, पेरू और अर्जेंटीना की ओर से भी कोलंबिया के साथ एकजुटता व्यक्त की गई। चिली ने आपदा प्रबंधन और भूकंप से निपटने में अपनी विशेषज्ञता साझा करने की पेशकश की। पेरू की ओर से मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए जरूरत पड़ने पर सहायता देने की बात कही गई। अर्जेंटीना ने भी कोलंबियाई अधिकारियों के संपर्क में रहने और आवश्यकता के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
मध्य अमेरिकी देशों ने भी कोलंबिया की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने जरूरत पड़ने पर बचाव दल, डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और राहत सामग्री भेजने की पेशकश की। अन्य लैटिन अमेरिकी देशों ने भी भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इस तरह क्षेत्रीय स्तर पर कोलंबिया के लिए व्यापक सहयोग की पेशकश सामने आई है।
यूरोप के अन्य देशों ने भी आपदा पर प्रतिक्रिया दी। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कोलंबिया में हुई तबाही पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों और राहतकर्मियों के प्रति एकजुटता जताई। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने भी कोलंबिया के लोगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। स्पेन की आपातकालीन एजेंसियां और वहां का राजनयिक तंत्र कोलंबिया में मौजूद अपने नागरिकों की स्थिति पर नजर रख रहा है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी कोलंबिया को आवश्यकता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी भूकंप में हुए नुकसान पर दुख व्यक्त किया और कोलंबिया के लोगों के प्रति समर्थन जताया। विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि प्राकृतिक आपदा के इस कठिन समय में कोलंबिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई देशों ने केवल संवेदना ही नहीं जताई, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर बचाव दल, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की भी पेशकश की है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला के लिए यह पद संभालने के शुरुआती दिनों में सामने आया एक बड़ा राष्ट्रीय संकट है। सरकार ने आपदा की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता, भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया जाए। साथ ही क्षतिग्रस्त इमारतों की जांच कर लोगों को संभावित आफ्टरशॉक्स से सुरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्य भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स का खतरा अभी भी बना हुआ है। इसी वजह से बचाव अभियान में जुटे दलों को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक क्षतिग्रस्त इमारतें बाद के झटकों में और कमजोर होकर गिर सकती हैं, इसलिए बिना सुरक्षा जांच के लोगों को उनमें प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। आने वाले घंटों में राहत एवं बचाव अभियान के साथ भूकंप से हुए वास्तविक नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कोलंबिया में आई इस त्रासदी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना महत्वपूर्ण होता है। अमेरिका और फ्रांस से लेकर पड़ोसी इक्वाडोर, वेनेजुएला और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों तक कई सरकारों ने कोलंबिया को सहायता का भरोसा दिया है। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाना, घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। राहत अभियान के साथ-साथ सरकार के सामने बुनियादी ढांचे को बहाल करने और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटाने की भी बड़ी चुनौती है।




