Next IAS करोल बाग में ‘Modified Governance’ का भव्य विमोचन, युवाओं से बोले प्रेम शंकर झा—‘सुशासन के केवल दर्शक नहीं, सहभागी बनें’

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नई दिल्ली। Next IAS, करोल बाग में IRSS-2008 बैच के अधिकारी एवं वर्तमान में भारतीय रेलवे में ADRM, मुरादाबाद के पद पर कार्यरत प्रेम शंकर झा की पुस्तक ‘Modified Governance: From Ancient Traditions to Citizen-Centric Administration’ का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में National Anti-Doping Agency (NADA) की Vice Chairman श्रीमती गीतांजलि शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। Next IAS के CMD श्री बी. सिंह के संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। विमोचन के अवसर पर प्रेम शंकर झा ने विद्यार्थियों को Governance की बदलती अवधारणा, नागरिक-केंद्रित प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका के बारे में विस्तार से संबोधित किया। प्रशासनिक सेवा में अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने Governance को केवल पाठ्यक्रम का विषय न मानकर उसे नागरिक जीवन और राष्ट्र निर्माण से जोड़कर देखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में मौजूद Civil Services aspirants ने Governance, प्रशासनिक व्यवस्था, नागरिक भागीदारी और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। प्रेम शंकर झा ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए समझाया कि Governance तभी प्रभावी बनता है, जब नागरिक उसमें सक्रिय भागीदार बनते हैं। उन्होंने विशेष रूप से Gen Z और Gen Alpha का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के पास शासन-व्यवस्था को समझने और उसे बेहतर बनाने के लिए अभूतपूर्व अवसर हैं। डिजिटल तकनीक और सूचना की सहज उपलब्धता ने युवाओं को केवल सरकारी नीतियों के लाभार्थी के बजाय नीति-निर्माण, प्रशासनिक सुधार और नागरिक सहभागिता की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनने का अवसर दिया है।

प्रेम शंकर झा ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे Governance को केवल UPSC की तैयारी के दृष्टिकोण से न देखें। उनके अनुसार, एक सुदृढ़ शासन व्यवस्था का आधार केवल सरकार और प्रशासन नहीं, बल्कि जागरूक, जिम्मेदार और सहभागी नागरिक भी होते हैं।

Modified Governance के माध्यम से लेखक ने भारत की पारंपरिक शासन अवधारणाओं और आधुनिक नागरिक-केंद्रित प्रशासन के बीच संबंधों को समझने का प्रयास किया है। पुस्तक में Governance को भारतीय संदर्भ, प्रशासनिक अनुभव और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में देखने की कोशिश की गई है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और प्रश्नों ने पूरे संवाद को जीवंत बना दिया। खास तौर पर Governance को किताबी अवधारणा से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर हुई चर्चा ने अभ्यर्थियों का ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था, भविष्य का Governance केवल सरकार द्वारा नहीं, बल्कि सरकार और नागरिकों की साझी भागीदारी से बेहतर होगा। और इस बदलाव में देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर Gen Z और आने वाली Gen Alpha, की भूमिका निर्णायक होने वाली है।

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