चीनी के बढ़ते भाव ने बढ़ाई चिंता, यूपी समेत कई राज्यों में जमाखोरी पर शिकंजा

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देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में अचानक तेजी आने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है। कुछ बाजारों में खुदरा चीनी के दाम 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। खासकर आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतों को बढ़ाने की कोशिश न हो। इसी उद्देश्य से चीनी मिलों, थोक कारोबारियों, डीलरों और बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक की निगरानी तेज की जा रही है।

केंद्र सरकार ने 1 अगस्त 2026 से चीनी कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू की है, जो 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। नई व्यवस्था के तहत कारोबारियों को अपने पास उपलब्ध चीनी के स्टॉक की जानकारी घोषित करनी होगी और संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर नियमित रूप से स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी। सरकार का उद्देश्य स्टॉक की पारदर्शिता बढ़ाना और यह पता लगाना है कि बाजार में उपलब्ध चीनी की वास्तविक मात्रा कितनी है। इसके साथ ही जरूरत से ज्यादा माल रोककर रखने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश में भी चीनी की कीमतों में तेजी को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को चीनी के गोदामों और थोक कारोबारियों के स्टॉक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा करने या कालाबाजारी करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बड़ी मात्रा में चीनी रखने वाले कारोबारियों के स्टॉक पर विशेष नजर रखने और निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण मिलने पर कार्रवाई करने की बात कही गई है।

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों के पास भी बड़ी मात्रा में स्टॉक मौजूद बताया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की विभिन्न चीनी मिलों में करीब 180 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है। इसमें सहकारी, निगम और निजी क्षेत्र की मिलों का स्टॉक शामिल है। सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्धता के बावजूद यदि खुदरा बाजार में अचानक कीमतें बढ़ रही हैं तो इसके कारणों की जांच जरूरी है। इसी वजह से मिलों से लेकर खुदरा बाजार तक सप्लाई चेन पर नजर रखी जा रही है।

चीनी की कीमतों में तेजी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी निगरानी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों को मिलों, थोक विक्रेताओं और डीलरों के स्टॉक का सत्यापन करने तथा किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। बिहार में भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों के बाद बाजार में उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति पर नजर बढ़ाई गई है।

चीनी के दाम बढ़ने के पीछे केवल जमाखोरी को जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है। इस साल गन्ने के उत्पादन और मौसम से जुड़ी चुनौतियों का भी चीनी उत्पादन पर असर पड़ा है। कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में खराब मौसम और फसल संबंधी समस्याओं के कारण उत्पादन अनुमान प्रभावित हुआ है। इसके अलावा अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन शुरू होने के कारण चीनी की मांग भी बढ़ जाती है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों में मिठाइयों तथा अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत में भी तेजी आती है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि चीनी उत्पादन में संभावित कमी को केवल इथेनॉल उत्पादन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारी पक्ष के मुताबिक उत्पादन पर मौसम और गन्ने की पैदावार जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ा है। हालांकि, बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी को देखते हुए सरकार किसी भी तरह की सट्टेबाजी, जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने की गतिविधि को रोकना चाहती है।

थोक बाजार में भी चीनी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। कुछ प्रमुख बाजारों में कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। सरकार की नजर विशेष रूप से उन कारोबारियों पर है जो बड़ी मात्रा में चीनी खरीदकर उसे बाजार में उतारने के बजाय लंबे समय तक रोककर रखते हैं। सरकार का मानना है कि वास्तविक आपूर्ति और मांग की स्थिति से अलग यदि कीमतों में तेजी आती है तो उसके पीछे जमाखोरी या सट्टा कारोबार की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

बड़े औद्योगिक और थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक संबंधी नियम सख्त किए गए हैं। सितंबर से नवंबर के बीच महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा को 15 दिनों की खपत के बराबर रखने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य बड़े खरीदारों द्वारा लंबे समय तक भारी मात्रा में चीनी जमा करके रखने की संभावना को कम करना है।

नई व्यवस्था में साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्टिंग को भी महत्वपूर्ण माना गया है। कारोबारियों को अपने स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध करानी होगी, जिससे केंद्र सरकार बाजार की स्थिति की निगरानी कर सके। यदि किसी क्षेत्र में अचानक स्टॉक कम दिखाई देता है या किसी कारोबारी के पास निर्धारित सीमा से अधिक चीनी मिलती है, तो प्रशासन उसकी जांच कर सकता है।

सरकार का कहना है कि देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए चीनी उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को घबराकर बड़ी मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत नहीं है। प्रशासन की कोशिश है कि मिलों से लेकर थोक बाजार और फिर खुदरा दुकानों तक आपूर्ति सामान्य बनी रहे। यदि जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई होती है तथा बाजार में नियमित आपूर्ति जारी रहती है, तो आने वाले समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

हालांकि, चीनी की कीमतों को सामान्य करने में केवल सरकारी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी। गन्ने का उत्पादन, मौसम, मिलों की बिक्री, घरेलू मांग और त्योहारी खपत जैसे कई कारक आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित करेंगे। ऐसे में सरकार की ओर से स्टॉक की लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकता बाजार में कृत्रिम कमी रोकना, जमाखोरी पर लगाम लगाना और आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई से राहत दिलाना है।

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