भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से होने वाले आयात में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अगस्त 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक रूस भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है, जबकि अमेरिका ने LPG और LNG दोनों की आपूर्ति में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने दुनिया के ऊर्जा कारोबार को प्रभावित किया है। भारत ने भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाकर आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है।
भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल, LPG तथा LNG का बड़े पैमाने पर आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों, समुद्री परिवहन, प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में होने वाला बदलाव सीधे भारत के ऊर्जा बिल और घरेलू बाजार पर असर डाल सकता है। इसी वजह से भारत की रिफाइनरियां और ऊर्जा कंपनियां अलग-अलग देशों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर जोर दे रही हैं।
अगस्त 2026 में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहा। हालांकि अगस्त में रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की मात्रा जुलाई के मुकाबले लगभग 26 प्रतिशत कम रही, इसके बावजूद कुल भारतीय कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त में भारत ने रूस से लगभग 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जबकि जुलाई में यह मात्रा लगभग 2.82 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी। इसके बावजूद रूस ने अन्य प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में अपनी बढ़त बनाए रखी।
रूसी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद वैश्विक तेल व्यापार की दिशा में बदलाव आया और भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की उपलब्धता तथा अपेक्षाकृत आकर्षक कीमतों का फायदा उठाते हुए खरीद बढ़ाई। जुलाई 2026 में तो रूस की हिस्सेदारी भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 50 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में इसमें कमी आई, लेकिन रूस अब भी भारतीय ऊर्जा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा तेल स्रोत बना हुआ है।
रूसी तेल की खरीद में अगस्त के दौरान आई गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। रूस से उपलब्ध आपूर्ति में बदलाव, चीन की ओर से बढ़ी मांग, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की परिस्थितियां और परिवहन लागत जैसे कारकों ने भारतीय आयात को प्रभावित किया। इसके अलावा रूसी कच्चे तेल पर पहले मिलने वाला मूल्य लाभ भी कुछ हद तक कम हुआ है। इसका मतलब यह है कि भारतीय रिफाइनरों के लिए रूसी तेल अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन खरीद का फैसला अब केवल कीमत के आधार पर नहीं बल्कि उपलब्धता, शिपिंग लागत और भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
जहां कच्चे तेल के मामले में रूस सबसे आगे है, वहीं LPG के क्षेत्र में अमेरिका ने भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में बढ़त बना ली है। अगस्त 2026 में अमेरिका से भारत को लगभग 7.19 लाख टन LPG की आपूर्ति हुई। यह भारत के कुल LPG आयात का करीब आधा हिस्सा था। हालांकि अमेरिकी LPG की मात्रा जुलाई की तुलना में कम रही, फिर भी अमेरिका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहा। भारत के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी LPG खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
अमेरिका की LPG आपूर्ति में बढ़ी भूमिका का संबंध पश्चिम एशिया में पैदा हुए तनाव और ऊर्जा परिवहन मार्गों को लेकर बढ़ी चिंता से भी जोड़ा जा रहा है। भारत लंबे समय से खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LPG खरीदता रहा है, लेकिन हालात बदलने के बाद अमेरिकी आपूर्ति ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत की है। हालांकि खाड़ी देशों की भूमिका समाप्त नहीं हुई है। अगस्त में UAE और कुवैत समेत कुछ प्रमुख खाड़ी देशों से भारत को LPG की आपूर्ति में फिर बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे संकेत मिलता है कि भारत एक साथ कई स्रोतों को सक्रिय रखना चाहता है।
LNG यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस के मामले में भी अमेरिका भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। अगस्त में अमेरिका से भारत को लगभग 8.58 लाख टन LNG मिली, जो भारत के कुल LNG आयात का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा था। यह मात्रा जुलाई की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक रही। अमेरिका की LNG आपूर्ति बढ़ने से भारत को गैस की जरूरत पूरी करने के लिए वैकल्पिक स्रोत मिला है और इससे पश्चिम एशिया के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है।
LNG के क्षेत्र में कतर लंबे समय से भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन हालिया भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति का समीकरण बदलता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के साथ नाइजीरिया, ओमान और UAE जैसे देशों से भी भारत LNG खरीद रहा है। अगस्त में नाइजीरिया LNG का दूसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। वहीं कतर और अन्य खाड़ी देशों ने भी भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी है। इससे पता चलता है कि भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए भी किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय कई स्रोतों के बीच संतुलन बना रहा है।
भारत की ऊर्जा खरीद में हुए इस बदलाव के पीछे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा भू-राजनीतिक जोखिम भी अहम माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद भारत ने ऐसे स्रोतों और समुद्री मार्गों से खरीद बढ़ाने पर जोर दिया, जहां किसी एक संवेदनशील क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। इसी प्रक्रिया में रूस से कच्चे तेल की खरीद और अमेरिका से LPG तथा LNG की आपूर्ति भारतीय ऊर्जा रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से बनकर सामने आए हैं।
इसके बावजूद खाड़ी देशों का महत्व कम नहीं हुआ है। अगस्त में कतर, ओमान और UAE से LNG की संयुक्त आपूर्ति में बढ़ोतरी देखी गई। इसी तरह LPG के मामले में भी खाड़ी देशों ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी वापस बढ़ाने की कोशिश की है। इसका अर्थ यह है कि भारत एक तरफ अमेरिका और रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीद रहा है, तो दूसरी तरफ पारंपरिक खाड़ी आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी अपने ऊर्जा संबंध बनाए रख रहा है।
भारत की मौजूदा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण है। कच्चे तेल के लिए रूस सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है, जबकि LPG और LNG में अमेरिका की भूमिका सबसे मजबूत हो गई है। इसके साथ ही भारत UAE, इराक, कुवैत, कतर, नाइजीरिया, वेनेजुएला और अन्य देशों से भी ऊर्जा खरीद जारी रखे हुए है। इससे भारत को किसी एक देश या क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दूसरे स्रोतों से जरूरत पूरी करने का विकल्प मिलता है।
आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा की नियमित और किफायती आपूर्ति बनाए रखना होगी। रूसी तेल की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, चीन की मांग, पश्चिम एशिया का तनाव, समुद्री परिवहन की लागत और वैश्विक तेल-गैस कीमतें भारत की खरीद रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। अगस्त में रूसी कच्चे तेल के आयात में आई गिरावट यह संकेत देती है कि भारत की खरीद परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदल सकती है।
कुल मिलाकर अगस्त 2026 के आंकड़े भारत के ऊर्जा आयात की बदलती तस्वीर को सामने रखते हैं। कच्चे तेल के मामले में रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जबकि LPG और LNG की आपूर्ति में अमेरिका शीर्ष पर पहुंच गया है। यह बदलाव केवल व्यापारिक आंकड़ा नहीं बल्कि भारत की व्यापक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का संकेत भी है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत अब अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीदकर अपने आपूर्ति नेटवर्क को अधिक विविध और लचीला बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी एक देश, क्षेत्र या समुद्री मार्ग में संकट पैदा होने पर घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर न पड़े।




