देशभर में बाइक टैक्सी चलाने की तैयारी? गडकरी ने बताया सरकार का प्लान

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देश में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर बड़ा संकेत दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को अनुमति देने की अपील की है। उनका कहना है कि बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने से लोगों को सस्ता और सुविधाजनक परिवहन मिल सकता है और बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि अब देश के सभी राज्यों में एक साथ बाइक टैक्सी चलने लगेगी। फिलहाल इसके संचालन से जुड़े अंतिम फैसले राज्य सरकारों और स्थानीय परिवहन प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

गडकरी ने 2 सितंबर 2026 को एक कार्यक्रम के दौरान बाइक टैक्सी के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्यों में बाइक टैक्सी को अनुमति मिलती है तो बड़ी संख्या में मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिक यात्री परिवहन के जरिए अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि देश में बाइक टैक्सी को बड़े पैमाने पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उनके मुताबिक यह मॉडल खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा सीमित है।

बाइक टैक्सी का इस्तेमाल देश के कई शहरों में पहले से हो रहा है। कम दूरी की यात्रा के लिए यह विकल्प कार या ऑटो की तुलना में कम खर्चीला और कई बार ज्यादा तेज साबित होता है। भारी ट्रैफिक वाली सड़कों पर दोपहिया वाहन आसानी से आगे बढ़ सकते हैं, जिससे यात्रियों का समय बच सकता है। ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं ने पिछले कुछ वर्षों में शहरी परिवहन के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है और अब कंपनियां महानगरों के साथ-साथ छोटे तथा मध्यम शहरों में भी इस सेवा का विस्तार करने की कोशिश कर रही हैं।

हालांकि बाइक टैक्सी के देशव्यापी विस्तार के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग राज्यों के नियम हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों को एग्रीगेटर नियमों के तहत दोपहिया वाहनों को यात्री परिवहन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने का विकल्प दिया है, लेकिन इसे लागू करना राज्यों के निर्णय पर निर्भर करता है। मोटर वाहन अधिनियम में ‘बाइक टैक्सी’ को अलग श्रेणी के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में इसके संचालन को लेकर अलग-अलग नीतियां और कानूनी स्थिति देखने को मिलती है।

कुछ राज्यों में बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति दी गई है, जबकि कुछ जगहों पर इनके संचालन को लेकर नियम, परमिट और सुरक्षा मानकों पर विवाद बना हुआ है। राज्यों के पास अपने क्षेत्र में एग्रीगेटर सेवाओं के लिए शर्तें निर्धारित करने का अधिकार है। इनमें वाहन का पंजीकरण, परमिट, बीमा, चालक की पात्रता, यात्री सुरक्षा और एग्रीगेटर की जिम्मेदारी जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। इसलिए केंद्र सरकार की अपील के बावजूद देश के हर राज्य में बाइक टैक्सी सेवा शुरू होने के लिए संबंधित राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।

बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने के पीछे रोजगार के साथ-साथ सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का तर्क भी दिया जा रहा है। भारत में बड़ी संख्या में लोग निजी दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। यदि नियमन के तहत उन्हें यात्रियों को किराये पर ले जाने की अनुमति मिलती है तो वे अपनी मोटरसाइकिल या स्कूटर के जरिए अतिरिक्त आय कमा सकते हैं। खासकर युवाओं और उन लोगों के लिए यह कम निवेश में आय का विकल्प बन सकता है, जो पहले से दोपहिया वाहन रखते हैं।

हालांकि बाइक टैक्सी के विस्तार के साथ सड़क सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठते हैं। दोपहिया वाहन चालकों और यात्रियों के लिए हेलमेट, पर्याप्त बीमा कवर, वाहन की फिटनेस, चालक का सत्यापन और ड्राइविंग रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होंगी। दुर्घटना की स्थिति में यात्री को उचित बीमा और मुआवजा मिले, इसके लिए भी स्पष्ट नियमों की आवश्यकता है। इसी कारण कुछ राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर सुरक्षा और नियामकीय ढांचे से जुड़ी चिंताएं सामने आई हैं। सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि रोजगार और सस्ती परिवहन सुविधा को बढ़ावा देने के साथ-साथ यात्रियों और चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

इसी कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने यातायात नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई को और सख्त करने की योजना की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मोटर वाहन कानून में बदलाव के जरिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर चालक के ड्राइविंग रिकॉर्ड में नकारात्मक अंक दर्ज किए जा सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार नियम तोड़ता है और उसके नकारात्मक अंक एक निर्धारित सीमा तक पहुंच जाते हैं, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

इस प्रस्तावित सिस्टम का उद्देश्य ऐसे चालकों पर लगाम लगाना है जो बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं। सरकार का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने की व्यवस्था से सभी मामलों में वांछित सुधार नहीं हो पाता। अगर उल्लंघन का असर सीधे ड्राइविंग रिकॉर्ड और लाइसेंस की वैधता पर पड़ेगा तो वाहन चालक सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। हालांकि इस सिस्टम में किस अपराध पर कितने नकारात्मक अंक दिए जाएंगे और कितने अंक होने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जाएगा, इसका अंतिम ढांचा संबंधित कानूनी बदलाव और नियमों के जरिए स्पष्ट किया जाएगा।

गडकरी ने सड़क सुरक्षा के संदर्भ में वाहन चालकों की स्वास्थ्य जांच को भी महत्वपूर्ण बताया। विशेष रूप से भारी वाहन और हाईवे पर लंबे समय तक वाहन चलाने वाले ड्राइवरों की आंखों की रोशनी तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से ‘सुरक्षा’ नाम के पायलट कार्यक्रम के जरिए हाईवे और खनन क्षेत्रों में काम करने वाले ड्राइवरों तथा अन्य जोखिम वाले श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।

बाइक टैक्सी को लेकर आगे की तस्वीर अब राज्य सरकारों के फैसलों पर निर्भर करेगी। केंद्र सरकार ने नीति स्तर पर राज्यों को दोपहिया वाहनों को एग्रीगेटर आधारित यात्री परिवहन में शामिल करने का विकल्प दिया है और केंद्रीय मंत्री लगातार राज्यों से इसे अपनाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन प्रत्येक राज्य अपने स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर अलग फैसला कर सकता है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे देश में बाइक टैक्सी एक साथ शुरू होने जा रही है।

अगर अधिक राज्य बाइक टैक्सी को मंजूरी देते हैं और सुरक्षा, बीमा, परमिट तथा चालक सत्यापन से जुड़े स्पष्ट नियम लागू किए जाते हैं तो यह देश के परिवहन क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इससे यात्रियों को कम लागत में तेज परिवहन विकल्प मिल सकता है और दोपहिया वाहन मालिकों के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, सरकार का प्रस्तावित नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू होने पर बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों पर भी पहले की तुलना में अधिक सख्ती हो सकती है। इस तरह आने वाले समय में बाइक टैक्सी का विस्तार और सड़क सुरक्षा नियमों में बदलाव दोनों भारत की परिवहन व्यवस्था के महत्वपूर्ण मुद्दे बनने वाले हैं।

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