भारतीय सिम से विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाई जा रही थी जानकारी? NIA जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश की सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर जासूसी मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों पर संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाकर विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाने का आरोप है। जांच में जियो-टैग वाली तस्वीरों और वीडियो का भी जिक्र सामने आया है, जिनके जरिए किसी संवेदनशील स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। यह मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी कथित गतिविधियों की जांच के दौरान सामने आया है।

NIA के अनुसार, यह मामला रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के प्रतिष्ठानों और कैंटोनमेंट क्षेत्रों जैसे संवेदनशील स्थानों की कथित निगरानी से जुड़ा है। एजेंसी ने इस मामले को RC-01/2026/NIA-LKW के तहत दर्ज किया है। शुरुआती मामला उत्तर प्रदेश पुलिस ने दर्ज किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार के आदेश पर NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली। जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ लोगों ने संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें संदिग्ध विदेशी संपर्कों तक पहुंचाने का काम किया।

मामला पहली बार 14 मार्च 2026 को सामने आया था। NIA के दस्तावेजों के अनुसार, कौशांबी थाना क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग रेलवे स्टेशन, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और कैंटोनमेंट क्षेत्रों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शुरुआती तौर पर कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया। तलाशी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी सामग्री सामने आई, जिसने जांच एजेंसियों का ध्यान संभावित जासूसी गतिविधियों की ओर खींचा।

जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसियों को कथित तौर पर पता चला कि संवेदनशील स्थानों से जुटाई गई तस्वीरों और वीडियो को विदेशी संपर्कों तक भेजा जा रहा था। NIA का आरोप है कि इस नेटवर्क में शामिल लोगों ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। कुछ लोगों पर संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाने का आरोप है, जबकि कुछ अन्य पर तकनीकी उपकरणों और संचार माध्यमों के जरिए यह सामग्री आगे पहुंचाने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।

इस मामले में जियो-टैग वाली तस्वीरों और वीडियो को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जियो-टैग के जरिए किसी तस्वीर या वीडियो के साथ उस स्थान के भौगोलिक निर्देशांक यानी लोकेशन की जानकारी भी जुड़ सकती है। सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इस बात को लेकर है कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों की तस्वीरों के साथ सटीक लोकेशन उपलब्ध होने पर उनका इस्तेमाल किसी स्थान की निगरानी या उसकी रणनीतिक जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है। NIA ने आरोप लगाया है कि ऐसी जानकारी दुश्मन देश से जुड़े तत्वों तक पहुंचाई गई।

जांच एजेंसी ने भारतीय सिम कार्ड के कथित दुरुपयोग की बात भी कही है। NIA के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े लोगों ने विदेशी संपर्कों के लिए भारतीय मोबाइल सिम कार्ड हासिल करने और उनका इस्तेमाल कराने में मदद की। एजेंसी का आरोप है कि भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल देश के भीतर कथित गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने और विदेशी संपर्कों के साथ संचार बनाए रखने के लिए किया गया।

NIA की जांच में कथित तौर पर स्पाई कैमरों के इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखने के लिए छोटे कैमरों का इस्तेमाल किया गया और इन उपकरणों के जरिए गतिविधियों की जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन के आसपास सोलर पावर से चलने वाले कैमरों से संबंधित गतिविधियों की भी पड़ताल की गई। एजेंसी का आरोप है कि इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल संवेदनशील गतिविधियों और आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था।

इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। NIA ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों तथा गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के साथ Official Secrets Act और Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA की धाराएं शामिल हैं।

जांच का दायरा केवल इन 13 आरोपियों तक सीमित नहीं है। NIA के मुताबिक, मामले में अब तक कुल 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पांच नाबालिगों के संबंध में अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत Juvenile Justice Board के सामने रिपोर्ट पेश की गई है। नाबालिगों पर भी कथित तौर पर संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाने, जियो-टैग जानकारी उपलब्ध कराने, निगरानी उपकरणों से संबंधित गतिविधियों में मदद करने और भारतीय सिम कार्ड हासिल करने में सहायता करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कुछ लोग संवेदनशील स्थानों की पहचान और वहां की तस्वीरें-वीडियो जुटाने का काम कर रहे थे, जबकि अन्य लोग संचार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने में कथित तौर पर शामिल थे। एजेंसी अब कथित विदेशी संपर्कों, पैसों के लेन-देन, डिजिटल संचार और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सामान्य तस्वीरें और वीडियो भी तब महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी बन सकते हैं, जब उनके साथ सटीक लोकेशन, समय और गतिविधियों से संबंधित विवरण उपलब्ध हो। रेलवे स्टेशन, कैंटोनमेंट और सुरक्षा बलों के प्रतिष्ठान रणनीतिक एवं लॉजिस्टिक गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे स्थानों की अनधिकृत निगरानी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय मानी जाती है।

NIA का कहना है कि मामले में कथित गतिविधियां देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता रखती थीं। हालांकि, जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला अदालत करेगी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले में अदालत के स्तर पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

NIA की जांच अभी जारी रहने के कारण इस मामले में आने वाले दिनों में और भी नाम या नए तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी कथित विदेशी संपर्कों और पूरे नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाने के साथ-साथ यह भी जांच रही है कि संवेदनशील जानकारी किस उद्देश्य से जुटाई जा रही थी और उसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया। यह मामला डिजिटल तकनीक, मोबाइल कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया या मैसेजिंग माध्यमों के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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