केंद्र सरकार ने देश के आठ हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया है। राष्ट्रपति की ओर से की गई इन नियुक्तियों के बाद पटना, कलकत्ता, बॉम्बे, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब एवं हरियाणा तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में नेतृत्व स्तर पर बदलाव होगा। ये नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद की गई हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 5 सितंबर 2026 को इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की।
पटना हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव को नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ पटना हाईकोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक नेतृत्व में बदलाव होगा। न्यायमूर्ति राव दिल्ली हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और अब उन्हें बिहार के हाईकोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे की नियुक्ति की गई है। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। इस तरह महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के हाईकोर्ट में भी नेतृत्व का महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। दोनों नियुक्तियां एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के स्थानांतरण के जरिए की गई हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट को भी नया मुख्य न्यायाधीश मिला है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। इस नियुक्ति के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हाईकोर्ट के न्यायिक प्रशासन को नया नेतृत्व मिलेगा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसके अलावा ओडिशा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। इस प्रकार आठ हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ उच्च न्यायपालिका में व्यापक स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन हुआ है।
इन नियुक्तियों की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों से शुरू हुई थी। कॉलेजियम ने अगस्त 2026 में अलग-अलग बैठकों के दौरान कई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण से संबंधित सिफारिशें की थीं। केंद्र सरकार की मंजूरी और राष्ट्रपति की अधिसूचना के बाद इन सिफारिशों को औपचारिक नियुक्तियों में बदल दिया गया है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद न्यायिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायिक कार्यों के साथ-साथ हाईकोर्ट के प्रशासनिक संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बेंचों के गठन, मामलों के आवंटन और अदालत के प्रशासन से जुड़े कई अहम फैसलों में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका रहती है। ऐसे में एक साथ आठ हाईकोर्ट में नेतृत्व परिवर्तन का असर संबंधित अदालतों के न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर दिखाई देगा।
इन नियुक्तियों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कई न्यायाधीशों को उनके मौजूदा हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है। न्यायपालिका में इस तरह के स्थानांतरण का उद्देश्य विभिन्न हाईकोर्ट में अनुभवी न्यायाधीशों के प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव का इस्तेमाल करना भी माना जाता है। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित हाईकोर्ट में लंबित मामलों के प्रबंधन, बेंचों के गठन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नए नेतृत्व की प्राथमिकताएं सामने आने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की ओर से आठ हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति देश की उच्च न्यायपालिका में एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन है। पटना से लेकर कलकत्ता, बॉम्बे, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक इसका असर देखने को मिलेगा। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट को भी नया मुख्य न्यायाधीश मिला है। इन नियुक्तियों के साथ अब संबंधित हाईकोर्ट नए नेतृत्व के तहत न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।




