ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर सील जैसे इंतजाम, कई रास्तों पर बैरिकेड

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नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज, 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आयोजकों ने कार्यक्रम करने की घोषणा की है। प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित भीड़ को नियंत्रित करना है।

प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य रूप से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों के बीच आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों और समर्थकों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने तथा उनके पद से हटाए जाने की मांग की जा रही है। आयोजकों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से संबंधित गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि ये प्रदर्शनकारियों और संबंधित राजनीतिक समूहों के आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

रिपोर्टों के मुताबिक ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA से जुड़े छात्र समूहों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। कार्यक्रम के सुबह करीब 11 बजे शुरू होने की बात कही गई है। अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और आरजेडी सांसद मनोज झा सहित कुछ लोगों ने प्रदर्शन के समर्थन में शामिल होने की बात कही है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई ने भी लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है। इसके अलावा भारतीय युवा कांग्रेस की ओर से भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी सामने आई है।

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी है। पुलिस के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से हजारों लोगों के संभावित रूप से पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसी वजह से जंतर-मंतर और इसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि यदि भीड़ निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलती है या यातायात प्रभावित होता है तो स्थिति के अनुसार अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

जंतर-मंतर के आसपास गुरुवार से ही बैरिकेडिंग शुरू कर दी गई थी। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बैरिकेड लगाए गए हैं और कुछ संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई है। जनपथ और जंतर-मंतर की ओर आने वाले रास्तों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि सामान्य नागरिकों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना उद्देश्य नहीं है, लेकिन किसी भी अनधिकृत जमावड़े या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अपात्र नामों को हटाने के उद्देश्य से की जाती है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पुनरीक्षण किया जा रहा है। आयोग ने यह भी कहा है कि मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है।

SIR को लेकर विपक्षी दलों और कुछ नागरिक संगठनों की ओर से अलग-अलग सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में ऐसे लोगों के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं जो वास्तव में मतदान के पात्र हैं। प्रदर्शनकारी इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही और प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं और पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर न होने देने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं।

इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई कुछ रिपोर्टों ने भी राजनीतिक बहस को तेज किया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में आयोग के कुछ कदमों पर रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज की थीं। इन दावों के बाद विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों के संदर्भ में यह स्पष्ट किया है कि उसके प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। मुंबई समेत कुछ अन्य शहरों में भी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। विपक्षी दलों की ओर से भी अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। INDIA गठबंधन ने भी अक्टूबर के शुरुआती दिनों में चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम करने की घोषणा की है।

फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस की प्राथमिकता केंद्रीय दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भीड़ को निर्धारित नियमों के भीतर नियंत्रित करना है। दूसरी ओर प्रदर्शन के आयोजक SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपने सवालों के साथ विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। ऐसे में 2 अक्टूबर का यह प्रदर्शन मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच दिल्ली में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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