नई दिल्ली: संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद कई सांसदों को दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। नए गठन में जहां कई मौजूदा अध्यक्षों को उनके पद पर बरकरार रखा गया है, वहीं कुछ समितियों की अध्यक्षता में बदलाव भी किया गया है। इस फेरबदल में कांग्रेस सांसद शशि थरूर, चरणजीत सिंह चन्नी और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर समेत कई प्रमुख नेताओं को फिर से समितियों की जिम्मेदारी मिली है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बार फिर विदेश मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति विदेश मंत्रालय से जुड़े कामकाज, नीतियों, योजनाओं और बजटीय मामलों की संसदीय समीक्षा करती है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर समिति मंत्रालय से जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखती है। थरूर को इस समिति की जिम्मेदारी दोबारा मिलने से विदेश मामलों से जुड़े संसदीय कामकाज में निरंतरता बनी रहने की संभावना है।
कांग्रेस सांसद और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी कृषि संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। कृषि समिति के दायरे में कृषि क्षेत्र, किसानों से जुड़े मुद्दे, कृषि योजनाएं और संबंधित मंत्रालयों की नीतियां आती हैं। समिति इन विषयों की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिशें देती है। चन्नी को यह जिम्मेदारी पहले भी मिली थी और नए पुनर्गठन में भी उन्हें इसी पद पर रखा गया है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर को कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता फिर सौंपी गई है। यह समिति देश के कोयला, खनन और इस्पात क्षेत्रों से संबंधित मंत्रालयों के कामकाज और नीतियों की समीक्षा करती है। इन क्षेत्रों का संबंध ऊर्जा, औद्योगिक उत्पादन और बुनियादी ढांचे से होने के कारण समिति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। नए पुनर्गठन में अनुराग ठाकुर की जिम्मेदारी जारी रखी गई है।
संसदीय समितियों के पुनर्गठन में कुछ महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव भी किए गए हैं। वाणिज्य संबंधी समिति की अध्यक्षता भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी को दी गई है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन का स्थान लिया है। इसी तरह कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी समिति की जिम्मेदारी भाजपा सांसद सुजीत कुमार को सौंपी गई है। इन समितियों के माध्यम से संबंधित मंत्रालयों के कामकाज, नीतियों और विधायी विषयों की विस्तार से समीक्षा की जाती है।
रसायन एवं उर्वरक संबंधी समिति में भी बदलाव हुआ है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने भाजपा के कीर्ति आजाद का स्थान लिया है। वहीं रेलवे संबंधी समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता को दी गई है। उन्होंने सीएम रमेश की जगह ली है। रेलवे से जुड़ी नीतियों, परियोजनाओं, यात्री सुविधाओं और मंत्रालय के कामकाज की संसदीय समीक्षा इस समिति के दायरे में आती है।
कई अन्य समितियों में पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे सांसदों को भी दोबारा मौका दिया गया है। संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति से संबंधित समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है। वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। स्वास्थ्य व्यवस्था, चिकित्सा सेवाओं और संबंधित मंत्रालयों की नीतियों की समीक्षा इस समिति के प्रमुख कार्यों में शामिल है।
मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल से संबंधित समिति की अध्यक्षता पर बरकरार रखा गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज से संबंधित समिति की कमान कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका के पास जारी रहेगी। इसी तरह जल संसाधन संबंधी समिति की अध्यक्षता राजीव प्रताप रूडी को दोबारा दी गई है। इन समितियों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाती है।
ऊर्जा संबंधी संसदीय समिति की अध्यक्षता श्रीरंग बारणे के पास बनी रहेगी। वहीं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित समिति की जिम्मेदारी मेधा विश्राम कुलकर्णी के पास जारी रखी गई है। इन समितियों का काम संबंधित मंत्रालयों के कार्यक्रमों, नीतिगत फैसलों और बजट से जुड़े विषयों की समीक्षा करना है।
गृह मामलों की संसदीय समिति की अध्यक्षता भाजपा के राधा मोहन दास अग्रवाल को फिर मिली है। दूसरी ओर संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति की कमान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के पास बरकरार रखी गई है। सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल संचार और दूरसंचार से जुड़े मुद्दों पर यह समिति संबंधित मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा करती है।
उद्योग संबंधी समिति की अध्यक्षता डीएमके के तिरुचि शिवा को दी गई है। वहीं उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी समिति की जिम्मेदारी डीएमके सांसद कनिमोझी को दोबारा मिली है। इन समितियों के माध्यम से उद्योग, उपभोक्ता अधिकार, खाद्य वितरण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की जाती है।
संसदीय स्थायी समितियां संसद की निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन समितियों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद शामिल होते हैं और संबंधित मंत्रालयों के बजट, नीतियों, योजनाओं, विधेयकों तथा कामकाज की विस्तृत जांच की जाती है। समितियां जरूरत के अनुसार मंत्रालयों के अधिकारियों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से जानकारी ले सकती हैं और इसके बाद अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष प्रस्तुत करती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य सदन में होने वाली चर्चा से पहले जटिल विषयों की विस्तृत समीक्षा के लिए सांसदों को एक मंच उपलब्ध कराना है।
इस बार हुए पुनर्गठन में एक तरफ कई प्रमुख समितियों में पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे सांसदों को बरकरार रखा गया है, वहीं कुछ समितियों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। शशि थरूर, चरणजीत सिंह चन्नी और अनुराग ठाकुर को दोबारा जिम्मेदारी मिलना इस पुनर्गठन की प्रमुख बातों में शामिल है। इसके साथ ही सुधांशु त्रिवेदी, सुजीत कुमार, काकोली घोष दस्तीदार और सुधीर गुप्ता जैसे सांसदों को नई समितियों की अध्यक्षता सौंपी गई है। अब ये समितियां अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों से जुड़े नीतिगत, बजटीय और प्रशासनिक विषयों की समीक्षा नए कार्यकाल में आगे बढ़ाएंगी।




