संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का मार्च, हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात; ट्रैफिक पर असर

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नई दिल्ली: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहा विवाद अब सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। मंगलवार को इंडिया गठबंधन के कई विपक्षी सांसद संसद भवन परिसर में जुटे और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित विरोध मार्च की तैयारी शुरू हुई। विपक्षी नेताओं की योजना संसद के मकर द्वार से भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ तक मार्च निकालने की है। विपक्ष का कहना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा जाना जरूरी है।

इंडिया गठबंधन की ओर से प्रस्तावित इस मार्च में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों के शामिल होने की उम्मीद है। विपक्षी नेताओं ने अपने सांसदों से सुबह करीब 10:30 बजे संसद के मकर द्वार पर पहुंचने को कहा था। इसके बाद करीब 11 बजे मार्च शुरू करने की योजना बनाई गई। विपक्ष इस प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा।

इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के करीब चार हजार जवानों को विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। संसद मार्ग, निर्वाचन आयोग कार्यालय और जंतर-मंतर के आसपास अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा बलों को भीड़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है और महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

विपक्षी मार्च के कारण मध्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की भी आशंका है। संसद मार्ग, पटेल चौक, जीपीओ, अशोका रोड, जंतर-मंतर रोड और आसपास के इलाकों में पुलिस द्वारा यातायात को नियंत्रित या डायवर्ट किया जा सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को इन क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई रास्तों पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

विपक्ष के विरोध का मुख्य मुद्दा SIR यानी मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और मतदाताओं के सत्यापन से जुड़े नियमों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे किसी भी बदलाव से यह सुनिश्चित होना चाहिए कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से न हटें और चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कायम रहे। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल उठा रहे हैं और उनके खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

SIR और Form 6 को लेकर विवाद ने भी इस राजनीतिक टकराव को और बढ़ाया है। Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए मतदाता के नाम जोड़ने के लिए किया जाता है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि Form 6 में बदलाव किए गए हैं और इससे मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हुआ। अदालत में Form 6 को लेकर उठे सवालों के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग पर अपने आरोपों को दोहराया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के तहत काम कर रहा है।

इंडिया गठबंधन के इस प्रदर्शन की रूपरेखा विपक्षी दलों की बैठक में तैयार की गई थी। 30 सितंबर को हुई बैठक में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से आंदोलन करने की रणनीति पर चर्चा की थी। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले और अन्य विपक्षी नेताओं की भागीदारी रही थी। विपक्ष ने इस अभियान को ‘सेव डेमोक्रेसी’ जैसे व्यापक राजनीतिक मुद्दे से भी जोड़ने की बात कही है।

हालांकि इंडिया गठबंधन के सभी दल इस मार्च में शामिल नहीं हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने प्रस्तावित मार्च से दूरी बनाने का फैसला किया है। AAP नेता संजय सिंह का कहना है कि उनकी पार्टी SIR के मुद्दे पर अलग तरीके से आंदोलन कर रही है। पार्टी का कहना है कि वह इस विषय को जनता से जुड़े मुद्दे के रूप में उठा रही है। इस तरह विपक्षी एकजुटता के बीच भी मार्च को लेकर सभी दलों की रणनीति पूरी तरह एक जैसी नहीं है।

विपक्षी नेताओं के कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी शामिल है। विपक्षी नेता राष्ट्रपति के सामने SIR और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवाल और चिंताएं रखने की तैयारी में हैं। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को संवैधानिक स्तर पर उठाने की कोशिश के रूप में देख रहा है।

इस बीच दिल्ली पुलिस की नजर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बनी हुई है। SIR को लेकर पिछले दिनों राजधानी में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा और बैरिकेडिंग बढ़ाई गई है। पुलिस का प्रयास है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और संसद तथा निर्वाचन आयोग जैसे संवेदनशील संस्थानों के आसपास किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

अब सभी की नजर इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित मार्च पर है। विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार से निर्वाचन सदन की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे, जबकि पुलिस ने सुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं। एक ओर विपक्ष SIR और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को नियमों के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में मंगलवार का यह प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

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