घर वापसी पर महंगाई की मार, ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं तो फ्लाइट भी जेब पर भारी

SHARE:

नई दिल्ली/पटना। दीपावली और छठ महापर्व जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, बिहार जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। देश के अलग-अलग शहरों में नौकरी और कारोबार करने वाले बड़ी संख्या में लोग इन त्योहारों पर अपने घर लौटते हैं। यही वजह है कि त्योहारों से काफी पहले ही बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीटों की मांग तेजी से बढ़ गई है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और दूसरे प्रमुख शहरों से बिहार जाने वाली कई ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई दे रही है, जबकि कुछ ट्रेनों और तारीखों पर बुकिंग पूरी तरह भर चुकी है और यात्रियों को ‘नो रूम’ या ‘रिग्रेट’ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली से पटना जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में भी त्योहारी सीजन का असर साफ दिखाई दे रहा है। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस और तेजस राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में त्योहार के आसपास की तारीखों में सीटों की उपलब्धता काफी सीमित हो गई है। कुछ श्रेणियों में वेटिंग लगातार बढ़ रही है, जबकि कुछ तारीखों पर सीट उपलब्ध नहीं है। दिल्ली से दरभंगा जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और सरयू-यमुना एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में भी यात्रियों को कंफर्म टिकट के लिए जूझना पड़ रहा है। यही स्थिति बिहार के अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में भी देखने को मिल रही है।

बिहार आने वाले यात्रियों के लिए परेशानी सिर्फ रेल टिकट तक सीमित नहीं है। जिन लोगों को ट्रेन में कंफर्म सीट नहीं मिल रही है, वे अब विमान का विकल्प तलाश रहे हैं, लेकिन हवाई टिकटों की कीमत भी यात्रियों के बजट को झटका दे रही है। त्योहारों की बढ़ती मांग के कारण दिल्ली से पटना की कई उड़ानों का किराया सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। नवंबर की शुरुआत और खासकर छठ के आसपास की तारीखों में कुछ उड़ानों का एकतरफा किराया करीब 15 से 20 हजार रुपये या उससे भी अधिक तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।

हवाई किराये में बढ़ोतरी की स्थिति को इस बात से भी समझा जा सकता है कि कुछ तारीखों पर दिल्ली से पटना की उड़ान का शुरुआती किराया दिल्ली से दुबई जाने वाली कुछ उड़ानों से भी अधिक बताया जा रहा है। सामान्य दिनों में दिल्ली-पटना रूट पर जहां टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध हो जाता है, वहीं त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के साथ किराये में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अगस्त में जिस रूट पर टिकट करीब 5 से 6 हजार रुपये के आसपास मिल रहे थे, वहीं त्योहार के पीक सीजन में यही किराया कई गुना बढ़ गया है।

मुंबई और दूसरे महानगरों से बिहार आने वाले यात्रियों के लिए भी स्थिति आसान नहीं है। मुंबई-पटना रूट पर पीक तारीखों में हवाई किराया 26 हजार रुपये से ऊपर पहुंचने की जानकारी सामने आई है और कुछ विकल्पों में यह 35 हजार रुपये से भी अधिक बताया गया है। पुणे से पटना और बेंगलुरु से पटना आने वाली उड़ानों में भी त्योहार के आसपास किराये में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हैदराबाद से पटना का टिकट, जो सामान्य दिनों में काफी कम कीमत पर मिल सकता है, पीक अवधि में 20 हजार रुपये से अधिक तक पहुंचने की रिपोर्ट है।

त्योहारों के दौरान हवाई किराये में इस तरह की तेजी के पीछे यात्रियों की अचानक बढ़ने वाली मांग और सीटों की सीमित उपलब्धता बड़ी वजह मानी जा रही है। बिहार में दीपावली के बाद छठ का पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है और देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लाखों लोग इस दौरान अपने गांव और शहर लौटते हैं। खासकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के शहरों में रहने वाले प्रवासी परिवारों के लिए छठ पर घर लौटना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसी वजह से एक सीमित अवधि में यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है और इसका असर ट्रेन, विमान और बस तीनों परिवहन माध्यमों पर पड़ता है।

ट्रेन और विमान के अलावा लंबी दूरी की बस सेवाओं पर भी यात्रियों का दबाव बढ़ रहा है। दिल्ली, पंजाब, रांची, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से बिहार आने वाली बसों में त्योहारी सीजन को देखते हुए एडवांस बुकिंग बढ़ने लगी है। जिन यात्रियों को रेल टिकट नहीं मिल पा रहा है, उनमें से कई लोग बसों या निजी वाहनों का विकल्प चुन रहे हैं। इससे सड़क मार्ग पर भी यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है और पीक दिनों में बस किराये में भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे भी अतिरिक्त ट्रेनों और विशेष सेवाओं की तैयारी कर रहा है। त्योहारों के दौरान लंबी वेटिंग वाले रूट पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है। रेलवे की ओर से ‘ट्रेन ऑन डिमांड’ जैसी व्यवस्था के तहत यात्रियों की जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा अनारक्षित यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जनरल स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।

दिल्ली और पटना के बीच विशेष वंदे भारत सेवा चलाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार इस विशेष सेवा को 21 अक्टूबर से 28 नवंबर के बीच चलाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव में दो जोड़ी ट्रेनों को शामिल करने की बात सामने आई है। हालांकि किसी भी विशेष ट्रेन की अंतिम समय-सारिणी, किराया और संचालन की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही मानी जाएगी। इस तरह की अतिरिक्त सेवाएं शुरू होने पर नियमित ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा दबाव नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में रहने की संभावना है। दीपावली के आसपास घर लौटने वाले यात्रियों के साथ छठ के लिए बिहार पहुंचने वाले लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी। इसके बाद छठ पूजा समाप्त होने पर दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों की ओर वापस लौटने वाले यात्रियों के कारण वापसी की ट्रेनों और उड़ानों में भी भारी भीड़ देखने को मिल सकती है। यानी सिर्फ बिहार आने वाली सेवाएं ही नहीं, बल्कि बिहार से बाहर जाने वाली सेवाओं में भी टिकटों की मांग बढ़ने की संभावना है।

ऐसे में त्योहारों पर घर जाने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए जल्द यात्रा की योजना बनाना सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। जिन लोगों को नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा है, वे स्पेशल ट्रेन, क्लोन ट्रेन, वैकल्पिक स्टेशन या यात्रा की तारीख में थोड़ा बदलाव जैसे विकल्प देख सकते हैं। वहीं विमान से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी पीक तारीखों से एक-दो दिन पहले या बाद की उड़ानों की कीमतों की तुलना करना फायदेमंद हो सकता है।

कुल मिलाकर दीपावली और छठ से पहले बिहार जाने वाले यात्रियों के सामने इस बार यात्रा और बजट दोनों की चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ नियमित ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता तेजी से घट रही है और कई रूट पर नो रूम की स्थिति बन रही है, वहीं दूसरी तरफ फ्लाइट टिकटों की कीमतें आम यात्रियों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। ऐसे में यात्रियों की निगाहें रेलवे की ओर से घोषित होने वाली अतिरिक्त ट्रेनों और विशेष सेवाओं पर टिकी हैं। यदि समय रहते पर्याप्त स्पेशल ट्रेनें और अतिरिक्त परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो त्योहारी सीजन में घर लौटने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

Leave a Comment