देश आज 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना का 94वां स्थापना दिवस मना रहा है। यह दिन उन जांबाज वायु योद्धाओं के साहस, शौर्य और समर्पण को नमन करने का अवसर है, जो देश के आकाश की सुरक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार रहते हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने भारतीय वायुसेना के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने वायु योद्धाओं की बहादुरी, पेशेवर क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वायुसेना दिवस के अवसर पर देश के एयर वॉरियर्स को नमन किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना के साहस और देश के आसमान की सुरक्षा के प्रति उसके समर्पण को सलाम करते हुए कहा कि देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों के योगदान को भी याद किया। उनका संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय वायुसेना तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल के बीच अपनी परिचालन क्षमता, तकनीकी ताकत और आधुनिक युद्धक तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है।
भारतीय वायुसेना दिवस हर साल 8 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। शुरुआती दौर में यह एक छोटी हवाई इकाई के रूप में अस्तित्व में आई थी, लेकिन पिछले नौ दशकों से अधिक समय में इसने अपनी क्षमता, तकनीक और परिचालन भूमिका का लगातार विस्तार किया है। स्वतंत्रता के बाद देश की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों में वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई और आज यह भारत की सामरिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानी जाती है।
वायुसेना दिवस 2026 की थीम ‘भारतीय वायुसेना- अचूक, अभेद्य और सटीक’ रखी गई है। यह थीम आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच वायुसेना की सटीक कार्रवाई, मजबूत सुरक्षा क्षमता और हर चुनौती से निपटने की तैयारी को दर्शाती है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कहा कि भारतीय वायुसेना देश की रक्षा के लिए सतर्कता और दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ हमेशा तैयार है। उन्होंने आधुनिक तकनीक को तेजी से वायुसेना की परिचालन योजनाओं में शामिल करने और युद्धक तैयारियों को लगातार परखने पर जोर दिया।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने अपने संदेश में पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने एकीकृत हवाई अभियानों की निर्णायक क्षमता को प्रदर्शित किया और देश की संप्रभुता की रक्षा में भारतीय वायुसेना की क्षमता को सामने रखा। उनके मुताबिक, एक्सरसाइज वायुशक्ति, विभिन्न द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, ड्रोनाथॉन और बहुपक्षीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति जैसे कार्यक्रमों के जरिए वायुसेना लगातार अपनी परिचालन तैयारियों को परख रही है और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस साल वायुसेना दिवस के कार्यक्रमों में भारतीय वायुसेना की आधुनिक क्षमता के साथ उसकी गौरवशाली विरासत की भी झलक देखने को मिल रही है। मुख्य समारोह के लिए हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें परेड, हवाई प्रदर्शन और विभिन्न टीमों की प्रस्तुतियां शामिल हैं। वायुसेना की ड्रिल टीम, ड्रमर्स टीम और हेरिटेज फ्लाइट जैसे कार्यक्रम समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान करते हैं। इस दौरान वायुसेना के विभिन्न विमानों और सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना की ताकत में लड़ाकू विमानों के साथ-साथ परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर, निगरानी प्रणाली, ड्रोन और आधुनिक हथियार प्रणालियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान भारत की हवाई शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसके साथ ही स्वदेशी रक्षा तकनीक और आधुनिक नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। मौजूदा दौर में वायुसेना के सामने केवल पारंपरिक युद्ध की चुनौती नहीं है, बल्कि ड्रोन, साइबर और बहु-क्षेत्रीय युद्ध जैसी नई चुनौतियां भी हैं।
वायुसेना प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय वायुसेना की भूमिका केवल युद्ध के समय देश की रक्षा करने तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकट और अन्य आपात परिस्थितियों में भी वायुसेना राहत एवं बचाव अभियानों के जरिए नागरिकों की सहायता करती रही है। इस तरह वायुसेना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ संकट के समय मानवता की सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारतीय वायुसेना का ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ है, जिसका अर्थ ‘गौरव के साथ आकाश को छूना’ है। यह वाक्य वायुसेना के साहस, ऊंचे लक्ष्य और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है। 94वें वायुसेना दिवस पर यही भावना देश के उन सभी वायु योद्धाओं को सम्मान देने का आधार बन रही है, जिन्होंने अपने कर्तव्य और राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
वायुसेना दिवस केवल एक सैन्य समारोह नहीं, बल्कि देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले वायु योद्धाओं और उनके परिवारों के योगदान को याद करने का अवसर भी है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत देश के शीर्ष नेतृत्व ने इस मौके पर वायुसेना की बहादुरी और समर्पण को नमन किया है। नौ दशक से अधिक की अपनी यात्रा में भारतीय वायुसेना ने एक छोटी शुरुआत से आधुनिक और बहु-क्षेत्रीय वायु शक्ति तक का लंबा सफर तय किया है। आज का दिन इस गौरवशाली विरासत को याद करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए और अधिक सक्षम, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प का भी प्रतीक है।




