नई दिल्ली, जुलाई 2025: राज्यसभा में मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विशेष चर्चा हुई, जिसमें भारत-पाकिस्तान संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, और सिंधु जल संधि जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बहस हुई। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ भारत की कूटनीतिक नीति पर जोरदार जवाब दिया और सिंधु जल संधि को लेकर सरकार की सख्त मंशा जाहिर की।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय खुफिया एजेंसियों द्वारा पाकिस्तान में चलाए गए एक विशेष अभियान का कोड नाम है, जिसमें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों पर कार्रवाई की गई। इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की सीमा में रह रहे कुछ भारत विरोधी गुटों को निष्क्रिय करने की सूचनाएं सामने आई थीं। हालांकि सरकार ने इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन विपक्ष की ओर से इस पर बहस की मांग की गई थी।
एस. जयशंकर का जवाब: पाकिस्तान के प्रति नई नीति
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बहस के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा,
“हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है — अब हम मूकदर्शक नहीं हैं। अगर कोई भारत की संप्रभुता पर हमला करेगा, तो हम जवाब देंगे, वो भी अपने तरीके से। ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयां उसी नीति का हिस्सा हैं।”
“सबसे अहम निर्णयों में से एक यह रहा कि हमने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की प्रक्रिया शुरू की। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। हमने दशकों तक संयम दिखाया, लेकिन अब समय बदल चुका है।”
सिंधु जल संधि का संदर्भ: क्यों है यह महत्वपूर्ण?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई एक ऐतिहासिक संधि है, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में लागू किया गया था। इसके तहत भारत और पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली की अलग-अलग नदियों पर अधिकार दिए गए थे। भारत को व्यास, रावी और सतलुज, जबकि पाकिस्तान को झेलम, चिनाब और सिंधु नदी दी गई थीं।
हाल ही में भारत सरकार ने संधि की समीक्षा करते हुए कहा है कि पाकिस्तान इसका बार-बार दुरुपयोग करता रहा है और भारत के हितों की अनदेखी करता रहा है। विदेश मंत्री के अनुसार, इस संधि को “एकतरफा प्रतिबद्धता” मानना अब स्वीकार्य नहीं है।
विपक्ष के सवाल और सरकार का जवाब
विपक्षी नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पारदर्शिता की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पूछा,
“अगर ऑपरेशन इतना सफल था, तो सरकार संसद को पूरी जानकारी क्यों नहीं देती?”
इस पर जयशंकर ने तीखा जवाब दिया,
“यह राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है, कोई चुनावी मुद्दा नहीं। भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे विपक्ष कुछ भी कहे।”
‘नई विदेश नीति का युग’: भारत का बदला रुख
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अब भारत की विदेश नीति ‘तुष्टिकरण’ की जगह ‘सख्ती और जवाबदेही’ पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल प्रतिक्रियावादी नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव नीति अपना रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया है कि भारत की चुप्पी को कमजोरी नहीं समझा जाए।
भविष्य की दिशा: पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
जयशंकर ने अपने वक्तव्य के अंत में कहा,
“सिंधु जल संधि हो, आतंकवाद हो या सीमा पार से घुसपैठ भारत अब किसी भी मोर्चे पर झुकने वाला नहीं है। पाकिस्तान को समझना होगा कि पुराना भारत नहीं रहा।”
निष्कर्ष
राज्यसभा की यह चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अधिक आक्रामक और स्पष्ट रुख अपना रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों और सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार, दोनों ही भारत की रणनीतिक सोच में बदलाव को दर्शाते हैं।




