अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को अमेरिका की संघीय अपीलीय अदालत ने अवैध करार दे दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अधिकतर आयात शुल्क कानून के दायरे से बाहर थे। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने जो शक्तियाँ इस्तेमाल कीं, वे सीमाओं को पार करती हैं।
कितने फीसदी टैरिफ लगाए गए थे?
ट्रंप प्रशासन ने व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाने की शुरुआत 10% से की थी।
लेकिन भारत और ब्राजील जैसे देशों पर यह दर 50% तक पहुंच गई थी।
इन शुल्कों का सीधा असर इन देशों के निर्यात, खासकर स्टील, एल्यूमिनियम और अन्य औद्योगिक उत्पादों पर पड़ा।
अदालत का क्या कहना है?
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अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि
“राष्ट्रपति की ओर से सेक्शन 232 के तहत की गई कार्रवाइयाँ प्रक्रियात्मक रूप से गलत थीं।“
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अदालत ने साफ किया कि राष्ट्रपति को दी गई टैरिफ लगाने की शक्तियाँ बिना पारदर्शिता और जांच के इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं।
भारत के लिए कितनी राहत?
बड़ी राहत:
भारत उन प्रमुख देशों में शामिल था जो ट्रंप टैरिफ से प्रभावित हुए।
अब जब टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया है, भारत को कई तरह की संभावित राहत मिल सकती है:
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निर्यात को बढ़ावा:
उच्च टैरिफ हटने से भारतीय उत्पाद फिर से अमेरिकी बाजार में मूल्य प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं। -
पिछली वसूली पर रिफंड की उम्मीद:
भारतीय कंपनियाँ अदालत या अमेरिका के ट्रेड विभाग से पिछले टैरिफ रिफंड की मांग कर सकती हैं। -
द्विपक्षीय व्यापार में सुधार:
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संबंधों में नई गति आ सकती है।
यह फैसला क्यों अहम है?
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यह केवल ट्रंप के दौर की टैरिफ नीति पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि यह तय करता है कि
“क्या कोई राष्ट्रपति अकेले इतनी बड़ी आर्थिक नीति बदल सकता है?“
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इस फैसले से भविष्य के राष्ट्रपतियों की सीमाएं तय होती हैं और कांग्रेस की भूमिका को मजबूत किया गया है।
आगे क्या होगा?
अभी यह साफ नहीं है कि बाइडन प्रशासन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा या नहीं।
हालांकि, यदि यह फैसला लागू होता है, तो ट्रंप युग की टैरिफ नीति आर्थिक इतिहास का हिस्सा बन सकती है।
भारत को अब:
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अमेरिकी सरकार से बातचीत तेज करनी होगी
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WTO जैसे मंचों पर अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी
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और यह सुनिश्चित करना होगा कि राहत समय पर और पूरी मिले
अमेरिकी संघीय अदालत का यह फैसला न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
भारत के लिए यह फैसला एक बड़ी राजनयिक और आर्थिक जीत साबित हो सकता है – बशर्ते भारत इस मौके का सही इस्तेमाल करे।




