शाह की मध्यस्थता से कम हुआ तनाव, लोजपा ने अभी नहीं दी हरी झंडी

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बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों के बंटवारे का मुद्दा फिलहाल सुर्खियों में है। एनडीए के अंदर छोटे सहयोगी दलों के साथ मतभेदों और सीटों के फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। खासतौर पर लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के तेवर चर्चा का केंद्र बने हुए थे। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद चिराग का रुख अपेक्षाकृत नरम देखा गया है, लेकिन सीटों पर दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। सूत्रों के अनुसार अमित शाह की पहल के बाद चिराग और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच बातचीत हुई, जिसे गठबंधन के अंदरूनी असंतोष को शांत करने और सीट-फॉर्मूले को अंतिम रूप देने की कोशिश माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चिराग के नरम रुख से एनडीए के अंदर टूटने का जोखिम फिलहाल कम हुआ है, लेकिन सीटों की संख्या और वितरण के बिंदुओं पर आखिरी फैसला अभी बाकी है। लोजपा की मांगों और उनके तेवर ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी थी, जिसमें पार्टी अधिक सीटें पाने की उम्मीद कर रही थी। अमित शाह की मध्यस्थता के बावजूद लोजपा ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतिम सहमति से पहले पार्टी अपने हितों का पूरी तरह मूल्यांकन करेगी।

इस स्थिति से यह साफ़ होता है कि बिहार में सीट-बंटवारे का अगला चरण बातचीत और गणित दोनों पर निर्भर करेगा। अमित शाह का हस्तक्षेप फिलहाल गहमागहमी को कम करने में सफल रहा है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की राह खोल दी है, लेकिन चुनावी तारीखों की घोषणा के नजदीक आने के साथ ही सीट-फॉर्मूले पर तेज़ी से घटनाओं का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि निकट भविष्य में इस मसले पर निर्णय तेजी से आएगा और गठबंधन की रणनीति अंतिम रूप लेगी।

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