केरल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने घोषणा की है कि राज्य अब “अत्यधिक गरीबी” (Extreme Poverty) से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, जिससे केरल भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने यह लक्ष्य प्राप्त किया है। यह घोषणा मुख्यमंत्री ने 1 नवम्बर 2025 को “केरल पिरवी” (राज्य स्थापना दिवस) के अवसर पर आयोजित समारोह में की। राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक गरीबी समाप्त करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चलाया था, जिसके तहत लगभग 64,006 कमजोर परिवारों की पहचान कर उनके पुनर्वास और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विशेष “माइक्रो-प्लान” तैयार किए गए।
इस योजना के अंतर्गत चिन्हित परिवारों को भोजन सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया। इस अभियान में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, कुदुम्बश्री मिशन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक कल्याण विभाग ने मिलकर कार्य किया। सरकार के अनुसार, अप्रैल 2025 तक 50,401 परिवारों को अत्यधिक गरीबी की श्रेणी से बाहर निकाला जा चुका था। इसके अलावा, नीति आयोग की बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) रिपोर्ट 2023 के अनुसार, केरल में गरीबी दर केवल 0.55 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पूरे देश में सबसे कम है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के गठन के बाद इस लक्ष्य को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा था। इस दौरान विशेष रूप से उन परिवारों पर ध्यान दिया गया जो भोजन, स्वास्थ्य, आवास और स्थायी आय जैसी मूलभूत जरूरतों से वंचित थे। प्रत्येक परिवार के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया, ताकि कोई भी व्यक्ति अत्यधिक गरीबी में न रहे।
हालांकि, इस घोषणा के बाद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और अर्थशास्त्रियों ने सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने सर्वेक्षण, डेटा और मानकों को सार्वजनिक करे, ताकि इस दावे की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सराहनीय है, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में इसकी स्थायी प्रभावशीलता की जांच आवश्यक है।
मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि यह उपलब्धि केरल के सामाजिक विकास मॉडल की सफलता को दर्शाती है और अब सरकार यह सुनिश्चित करने पर काम करेगी कि कोई परिवार दोबारा गरीबी की स्थिति में न लौटे। राज्य सरकार का लक्ष्य अब इस मॉडल को सतत और आत्मनिर्भर बनाना है। यदि यह दावा सटीक साबित होता है, तो केरल न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का एक प्रेरक उदाहरण बन जाएगा।




