दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक तिरुमला तिरुपति बालाजी मंदिर (TTD) इन दिनों एक बड़े घोटाले के कारण सुर्खियों में है। श्रद्धालुओं को चढ़ने वाले प्रसिद्ध “तिरुपति लड्डू प्रसाद” में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर प्रशासन को जो घी सप्लाई किया गया, वह असली नहीं बल्कि मिलावटी था। जांच में सामने आया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच लगभग 68 लाख किलोग्राम नकली घी मंदिर को आपूर्ति किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹250 करोड़ बताई जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नकली घी को तैयार करने में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और कुछ रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इसे देखने और स्वाद में घी जैसा बनाया जा सके। इस पूरे घोटाले में कई डेयरी कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने कागजात में धांधली करते हुए असली घी के बजाय कृत्रिम घी मंदिर को पहुंचाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ कंपनियां पहले ब्लैकलिस्ट की जा चुकी थीं, लेकिन उन्होंने नई फ्रंट कंपनियों के नाम से ठेके लेकर आपूर्ति जारी रखी।
इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने जुलाई 2024 में मंदिर को भेजे गए कुछ घी के टैंकरों की जांच के दौरान उनकी गुणवत्ता को अस्वीकार कर दिया। जब उन टैंकरों की आगे पड़ताल की गई, तो पाया गया कि वही रिजेक्टेड बैच अलग नाम से फिर से मंदिर को भेजा गया। इसी से CBI और SIT को पूरे नेटवर्क की जांच का सुराग मिला। जांच में सामने आया कि कई सप्लायरों ने फर्जी बिल और भुगतान रसीदें तैयार कीं, ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने असली दूध और मक्खन खरीदा है, जबकि ऐसा हुआ ही नहीं।
जांच एजेंसियों ने अब तक दर्जनों संदिग्धों से पूछताछ की है और कई आपूर्तिकर्ताओं के ठिकानों पर छापेमारी भी की है। यह भी सामने आया कि कुछ कंपनियों के पास इतने बड़े पैमाने पर घी उत्पादन की क्षमता ही नहीं थी, फिर भी उन्होंने करोड़ों रुपए का ऑर्डर लिया और नकली उत्पादों की सप्लाई की। इससे न केवल श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं बल्कि मंदिर प्रशासन की खरीद प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
CBI की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घोटाला सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर अपराध है। एजेंसियां अब मंदिर प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका और घी की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया में हुई लापरवाही की भी जांच कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए TTD को पारदर्शी टेंडर प्रणाली, सख्त ऑडिट और तीसरे पक्ष की गुणवत्ता जांच प्रणाली लागू करनी चाहिए।
वर्तमान में CBI की जांच जारी है और कई नई जानकारियाँ सामने आने की संभावना है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम और आपराधिक साजिश के तहत कठोर दंड का प्रावधान लागू होगा। इस घोटाले ने न केवल मंदिर प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास को भी गहरा आघात पहुँचाया है।




