उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान गणना-फॉर्म की धीमी वापसी ने चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राज्य भर में घर-घर जाकर वितरित किए गए प्रपत्रों में से करीब 17.7 प्रतिशत फॉर्म अब तक जमा नहीं हुए हैं। संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग पौने तीन करोड़ (करीब 2.75 करोड़) फॉर्म का है, जो मतदाता सूची के अद्यतन कार्य पर सीधा असर डाल सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सही ढंग से पूरा करने के लिए चुनाव आयोग से SIR अवधि बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध किया है। आयोग भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतित और त्रुटियों से मुक्त बनाना है। इस प्रक्रिया में बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करते हैं, जिनमें प्रत्येक परिवार को अपनी जानकारी भरकर वापस जमा करनी होती है। इन फॉर्मों के आधार पर नए मतदाताओं का नाम जोड़ा जाता है, मृतक या स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाए या अपडेट किए जाते हैं और सूची में मौजूद त्रुटियों को ठीक किया जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया में देरी का सीधा प्रभाव ड्राफ्ट रोल, दावे-आपत्तियों की समय-सीमा और अंतिम मतदाता सूची की घोषणा पर पड़ता है।
प्रदेश के कई जिलों—जैसे मेरठ, कानपुर, अमेठी, गाजियाबाद और प्रयागराज—से लगातार रिपोर्टें मिल रही हैं कि बड़ी संख्या में फॉर्म या तो घरों से एकत्र नहीं हो पाए हैं, या नागरिकों ने उन्हें अभी तक भरकर वापस नहीं किया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों में तो अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृत (ASD) श्रेणी में डालने के लिए प्रस्तावित नामों की संख्या भी लाखों तक पहुँच रही है, जिससे आयोग और भी अधिक सतर्क हो गया है। आयोग को आशंका है कि यदि बिना पूर्ण सत्यापन के सूची जारी कर दी गई तो कई वैध मतदाता वंचित रह सकते हैं या गलत प्रविष्टियां शामिल रह सकती हैं।
इन परिस्थितियों में बूथ-स्तर अधिकारियों पर काफी दबाव बढ़ गया है। कई जिलों में BLO को पुनः घर-घर जाकर शेष फॉर्म एकत्र करने, जनता को जागरूक करने और जहां लापरवाही सामने आए वहां रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नागरिकों को डिजिटल विकल्प उपलब्ध है—वे ऑनलाइन भी गणना-फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधा की सीमित उपलब्धता के कारण भौतिक फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया को ही अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी इस पूरे घटनाक्रम पर तेजी से उभर रही है। विपक्षी दल सरकार और प्रशासन पर SIR के प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और मतदाता सूची को संभावित रूप से अधूरी बताकर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि SIR की प्रक्रिया जितनी व्यापक है, उतना ही स्वाभाविक है कि कुछ जिलों में देरी हो सकती है। उनका तर्क है कि समय-सीमा बढ़ने से डेटा वेरिफिकेशन और फॉर्म-संग्रह अधिक सटीकता से पूरा हो सकेगा।
संपूर्ण स्थिति को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि चुनाव आयोग जल्द ही SIR के लिए अतिरिक्त समय देने की घोषणा कर सकता है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही ड्राफ्ट रोल की नई तारीख, दावा-आपत्ति अवधि और अंतिम मतदाता सूची का कैलेंडर तय किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वैध मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी व त्रुटिरहित तरीके से संचालित हो सके।




