वंदे मातरम्’ पर राजनीति तेज, अमित शाह ने कांग्रेस के रुख को बताया ऐतिहासिक गलती

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगाँठ के अवसर पर संसद में अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस ने कई मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ का विरोध किया है, जबकि यह राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम का मूल भाव और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। शाह ने अपने भाषण में इस गीत के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वंदे मातरम् ने अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ देश को एकजुट किया और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा दी। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आत्मगौरव की धरोहर बताया।

अमित शाह ने अपने संबोधन में 2047 तक ‘महान भारत’ के विजन का भी उल्लेख किया और कहा कि वंदे मातरम् का 150वाँ वर्ष केवल एक समारोह नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का अभियान है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी को इस गीत के इतिहास और महत्व से परिचित कराया जा सके। शाह ने कहा कि यदि देश अपने सांस्कृतिक मूल्यों को पहचान ले तो ‘आत्मनिर्भर भारत’ का लक्ष्य दूर नहीं है।

उनके भाषण के दौरान संसद में राजनीति भी खूब गर्माई। विपक्ष ने विभिन्न आरोपों पर सरकार को घेरा, तो सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के ऐतिहासिक निर्णयों की आलोचना की। कई मौकों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्ष ने अमित शाह के बयानों को ऐतिहासिक तथ्यों की “चयनित व्याख्या” बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “सच्चाई को सामने लाने का प्रयास” कहा। चर्चा के दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

अमित शाह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। वंदे मातरम् पर इतिहास, राष्ट्रवाद और आधुनिक राजनीति — इन तीनों का मिश्रण फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श को और तेज करेगा, खासकर ऐसे समय में जब देश सांस्कृतिक मुद्दों पर गहरी बहस के दौर से गुजर रहा है।

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