नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक विशेष कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने संगठन की भूमिका, विचारधारा और उसके विकास पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संघ किसी तरह का परिवर्तन नहीं कर रहा है, बल्कि समय के साथ स्वाभाविक रूप से विकसित हो रहा है और नए रूप ले रहा है। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ के मूल सिद्धांत और विचारधारा वही हैं जो स्थापना के समय थे, लेकिन समाज की बदलती जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार उसकी कार्यशैली और स्वरूप में विस्तार हुआ है।
डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि संघ की यात्रा को बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि विकास के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे बीज और वृक्ष के उदाहरण से समझाया और कहा कि बीज और वृक्ष देखने में अलग लग सकते हैं, लेकिन दोनों का मूल एक ही होता है। इसी प्रकार संघ भी अपने मूल विचारों को बनाए रखते हुए समाज के बीच नए-नए माध्यमों से अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज को संगठित करना, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान संघ की शताब्दी यात्रा पर आधारित एक आगामी फिल्म के गीत एल्बम का भी विमोचन किया गया। यह फिल्म संघ के 100 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े योगदान को दर्शाएगी। गीतों के माध्यम से संघ की यात्रा, उसके कार्य और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी, कलाकार और फिल्म से जुड़े निर्माता-निर्देशक भी मौजूद रहे।
डॉ. भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन देशभक्ति, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने जिस विचारधारा के साथ संघ की स्थापना की थी, आज भी संघ उसी भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। संघ का लक्ष्य समाज को संगठित कर एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करना है।
अपने संबोधन में भागवत ने यह भी कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर सेवा, संस्कार और राष्ट्रभाव को मजबूत करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि संघ समय के साथ अपनी कार्यप्रणाली में नवीनता ला रहा है, लेकिन उसकी आत्मा और उद्देश्य कभी नहीं बदले हैं।
कुल मिलाकर, डॉ. मोहन भागवत के इस बयान से यह संदेश साफ है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है और समाज के बदलते स्वरूप के अनुरूप स्वयं को विकसित करते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।




