राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठा गणतंत्र दिवस, नेताओं ने दिया लोकतंत्र का संदेश

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नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026: देश आज पूरे उत्साह और गर्व के साथ 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विपक्षी नेताओं समेत कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और संविधान, लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता के महत्व को रेखांकित किया। सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए नेताओं ने नागरिकों से संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन भारत की आन-बान-शान और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने देशवासियों से संविधान के आदर्शों पर चलते हुए विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने की अपील की। पीएम मोदी ने अपने संदेश में एकता, नवाचार और सामूहिक प्रयासों के जरिए देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की बात कही।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गणतंत्र दिवस पर कहा कि गणतंत्र हर नागरिक का है और संविधान इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इसे आम लोगों के अधिकारों, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करने वाला आधार बताया। राहुल गांधी ने नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजने और संविधान की भावना को जीवित रखने का आग्रह किया।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मौके पर संविधान को नागरिकों के अधिकारों का सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि यह समानता और न्याय की गारंटी देता है। उन्होंने देशवासियों से संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का संकल्प लेने की अपील की।

वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इसे भारत की लोकतांत्रिक शक्ति, एकता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बताया। उन्होंने नागरिकों से संविधान के आदर्शों का पालन करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस 2026 पर नेताओं के संदेशों में संविधान के सम्मान, लोकतंत्र की मजबूती, राष्ट्रीय एकता और भविष्य के भारत के निर्माण का साझा स्वर देखने को मिला, जिसने इस राष्ट्रीय पर्व की भावना को और सशक्त किया।

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