बजट 2026 से पहले रक्षा क्षेत्र को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि इस बार सरकार सैन्य आधुनिकीकरण पर खर्च में करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। मौजूदा सुरक्षा हालात और हाल के सैन्य अभियानों को देखते हुए रक्षा बजट को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शीर्ष स्थान मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस केवल नियमित खर्च तक सीमित न रहकर सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की युद्ध रणनीति और सुरक्षा सोच को नए सिरे से परिभाषित किया है। यह अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ माना जा रहा है और इससे जुड़े अनुभवों ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक हथियार प्रणालियों, उन्नत निगरानी तकनीक, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और साइबर क्षमताओं में निवेश अब अनिवार्य हो चुका है। ऐसे में बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि आने वाले बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि सेना के वेतन और रखरखाव के अलावा नए लड़ाकू उपकरण, स्वदेशी हथियार, आधुनिक वाहन, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं के विस्तार पर ज्यादा धन खर्च किया जाएगा। इससे न केवल सैन्य ताकत बढ़ेगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने अभिभाषण में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए आतंकवाद और बाहरी खतरों के खिलाफ निर्णायक जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। इसे रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि मजबूत रक्षा ढांचा ही देश की संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 को रक्षा क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक बजट माना जा रहा है, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण, नई तकनीकों में निवेश और दीर्घकालिक सुरक्षा तैयारियों पर विशेष ध्यान रहेगा। यदि रक्षा खर्च में अनुमानित बढ़ोतरी होती है, तो यह भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई देने और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से मिले सबक को स्थायी रणनीति में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।




