विपक्ष का तंज: बड़े दावे, लेकिन आम जनता के लिए कुछ खास नहीं

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026–27 पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने बजट को उम्मीदों के विपरीत बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने बजट से पहले बनाए गए माहौल पर तंज कसते हुए कहा कि “जो भारी माहौल बनाया गया था, वह बजट के बाद पूरी तरह फीका साबित हुआ।” विपक्ष का आरोप है कि यह बजट आम जनता की समस्याओं को हल करने में नाकाम रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बजट को “पूरी तरह फीका” करार देते हुए कहा कि लंबे भाषण के बावजूद इसमें न तो कोई नई सोच दिखाई दी और न ही स्पष्ट दिशा। उन्होंने कहा कि बजट में बड़े-बड़े दावों के अलावा ऐसा कुछ नहीं है, जिससे आम लोगों को सीधी राहत मिल सके। कांग्रेस का मानना है कि सरकार ने बजट के जरिए जो उम्मीदें जगाईं थीं, वे पूरी नहीं हो सकीं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “आंख बंद करके बनाया गया बजट” बताया और कहा कि इसमें बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की बदहाल स्थिति जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। राहुल गांधी के अनुसार यह बजट देश के युवाओं और मेहनतकश वर्ग की वास्तविक चुनौतियों से आंखें मूंदे हुए है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इसमें मध्यम वर्ग और राज्यों की जरूरतों को लेकर ठोस योजनाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि बजट में आंकड़ों और घोषणाओं की भरमार तो है, लेकिन जमीन पर असर डालने वाले उपाय कम नजर आते हैं। थरूर ने यह भी कहा कि बजट में सामाजिक क्षेत्र पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार की आलोचना की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को “डिफॉर्म बजट” बताते हुए कहा कि यह केवल चुनिंदा लोगों के हित में तैयार किया गया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि बजट में राज्यों के साथ भेदभाव किया गया है और आम लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कुल मिलाकर विपक्ष का कहना है कि बजट 2026–27 में न तो कोई स्पष्ट विजन है और न ही आम जनता की समस्याओं का ठोस समाधान। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने बड़े दावों और प्रचार के जरिए बजट को ऐतिहासिक बनाने की कोशिश की, लेकिन वास्तविकता में यह बजट जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस बजट को लेकर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।

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