रिश्तों में सुधार के संकेत, भारत-चीन व्यापार ने बनाया नया कीर्तिमान

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भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल के वर्षों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर रिकॉर्ड 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में दो अंकों में दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि राजनीतिक मतभेदों और सीमाई तनाव के बावजूद आर्थिक स्तर पर आपसी निर्भरता लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन, उद्योगों की जरूरतों और बाजार की मांग ने दोनों देशों को व्यापारिक सहयोग बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है।

आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत से चीन को होने वाले निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रसायन, लौह अयस्क, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक कच्चे माल के निर्यात में तेजी आई है, जबकि चीन से भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, सौर उपकरण और फार्मा सेक्टर से जुड़ी सामग्री का आयात बढ़ा है। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं कई क्षेत्रों में एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हालांकि, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा अब भी चिंता का विषय बना हुआ है, जिस पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।

राजनयिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ने के संकेत मिले हैं। वीज़ा प्रक्रिया में सहूलियत, कुछ हवाई सेवाओं की बहाली और उच्चस्तरीय बैठकों ने कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई है। चीनी अधिकारियों की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह सकारात्मक रुख बना रहता है, तो आने वाले समय में भारत-चीन व्यापार और निवेश संबंधों में और मजबूती आ सकती है, जिसका असर न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिलेगा।

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