वैश्विक राजनीति पर भारत का नजरिया, जयशंकर बोले—दुनिया बहुध्रुवीय हो रही

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वैश्विक तनाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विश्व व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कोई भी देश खुद को दुनिया की “सर्वोच्च ताकत” नहीं कह सकता, क्योंकि वैश्विक शक्ति अब एक ही देश के हाथ में केंद्रित नहीं रही है। उनका यह बयान नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान सामने आया, जहां उन्होंने बदलती वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर विस्तार से अपने विचार रखे।

विदेश मंत्री ने कहा कि 20वीं सदी के मध्य में जो वैश्विक व्यवस्था बनी थी, उसे स्थायी मान लेना सही नहीं है। उनके मुताबिक 1945 के बाद या फिर शीत युद्ध के अंत के बाद बनी विश्व व्यवस्था को स्थिर समझना अवास्तविक था, क्योंकि दुनिया समय के साथ लगातार बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि पिछले 70–80 वर्षों का इतिहास भारत जैसी प्राचीन सभ्यताओं के हजारों साल के इतिहास की तुलना में बहुत छोटा है और इसलिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बदलाव स्वाभाविक है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि आज दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां कई देश अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार अब किसी देश की ताकत केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक शक्ति से तय नहीं होती, बल्कि तकनीक, जनसंख्या, आर्थिक क्षमता और कूटनीतिक प्रभाव जैसे कई कारक मिलकर वैश्विक प्रभाव तय करते हैं।

उन्होंने भविष्य की वैश्विक राजनीति को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा कि आने वाले समय में दुनिया की दिशा तय करने में तकनीक और जनसंख्या सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। इन दोनों कारकों के कारण वैश्विक शक्ति संतुलन लगातार बदलता रहेगा और नई शक्तियां उभरती रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तेजी से नए रूप में ढल रही है।

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