असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि इस बार राज्य की जनता कांग्रेस को वोट नहीं देगी। उन्होंने चुनावी सभाओं में “स्थानीय मूल भारतीय” का मुद्दा उठाते हुए कहा कि असम की पहचान, संस्कृति और मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उनके इस बयान को भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय अस्मिता और वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा पर लगातार हमलावर है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Gaurav Gogoi ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने पूर्व कांग्रेसी नेताओं को शामिल कर राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की है और यह चुनाव अब विचारधारा से ज्यादा नेतृत्व की लड़ाई बनता जा रहा है। कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी तैयारियों को गति दी है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।
इस बीच भाजपा ने भी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर जलुकबारी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी अपने कार्यकाल के विकास कार्यों और मजबूत संगठन के दम पर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं रहेगा, बल्कि “स्थानीय बनाम बाहरी” जैसे मुद्दे, नेतृत्व की विश्वसनीयता और विकास के वादे भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल असम में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है और सभी दल जनता को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। आने वाले दिनों में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है, जिससे राज्य का चुनावी परिदृश्य और भी दिलचस्प और प्रतिस्पर्धी बनता जा रहा है।




