दिल्ली जिमखाना क्लब पर केंद्र के कदम का केसी त्यागी ने किया समर्थन

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लालू यादव का किस्सा सुनाकर केसी त्यागी ने साधा निशाना, बोले कोलोनियल और इलीट मानसिकता का प्रतीक है क्लब

Reported by: निखिल रस्तोगी 

नई दिल्ली: राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने दिल्ली जिमखाना क्लब पर केंद्र सरकार की कार्रवाई का जोरदार समर्थन किया है। उन्होंने इस क्लब को उपनिवेशवादी और इलीट मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक बताया है। केसी त्यागी ने एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े राजनीतिक किस्से का जिक्र करते हुए इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

लालू प्रसाद यादव से जुड़ा किस्सा उन्होंने कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से उनके बड़े वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। लेकिन जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे, तब उन्होंने एक प्रतिष्ठित क्लब की सदस्यता के लिए आवेदन किया था। उस समय इन संस्थाओं के कर्ता-धर्ताओं ने उनकी सदस्यता के आवेदन को सीधे तौर पर ठुकरा दिया था। त्यागी ने तीखा सवाल उठाया कि आखिर ये संस्थाएं किन लोगों के लिए बनाई गई हैं। क्या इन क्लबों का एकमात्र उद्देश्य देश के भीतर आज भी पुरानी इंपीरियल सोच को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि हमारा साफ मानना है कि अब अंग्रेज तो जा चुके हैं, लेकिन उनकी अंग्रेजियत अब भी बाकी है।

कुर्ता-पायजामा पहनने वालों पर रोक

इन संस्थाओं में आज भी एक खास वर्ग का पूरी तरह से वर्चस्व बना हुआ है। भारतीय परिधान पहनने वालों तक को कई जगह प्रवेश नहीं मिलता है। कुर्ता-पायजामा जो हमारी भारतीयता की असली पहचान है, उसे पहनकर भी कई वीआईपी क्लबों में प्रवेश नहीं मिलता।

क्लबों का हो राष्ट्रीयकरण

यह भेदभाव वाली अंग्रेजियत मानसिकता अब देश से पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। हमारी समाजवादी विचारधारा हमेशा से ही ऐसे इलीट और कॉलोनियल संस्थानों के खिलाफ रही है। सरकार को अब सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर के ऐसे सभी क्लबों का राष्ट्रीयकरण कर देना चाहिए।

सभी को मिले समान अवसर

राष्ट्रीयकरण होने से समाज के सभी वर्गों के लोगों को समान अवसर मिल सकेंगे। इन जगहों पर आज भी समाज के बड़े वर्ग, साहित्य, कला, रंगमंच और मेहनतकश तबकों से जुड़े आम लोगों की पहुंच बिल्कुल नहीं है। इस भेदभाव को पूरी तरह मिटाना जरूरी है।

सुरक्षा कारणों से कदम उचित

केसी त्यागी ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा कारणों से जो कदम उठाया है, वह पूरी तरह उचित है। यह संस्था प्रधानमंत्री आवास के नजदीक सफदरजंग रोड पर स्थित है। वर्तमान वैश्विक हालातों को देखते हुए देश की सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

पीएम आवास की सुरक्षा बड़ी जिम्मेदारी

आज पूरे विश्व में लगातार बड़े तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री आवास के ठीक सामने स्थित इस तरह की संस्था का अधिग्रहण सुरक्षा की दृष्टि से बेहद आवश्यक है। हम भारत सरकार के इस बड़े फैसले से शत-प्रतिशत सहमत हैं।

महानगरों के क्लबों की हो समीक्षा

सरकार को सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी ऐसे क्लबों की समीक्षा करनी चाहिए। देश के जहां-जहां भी अंग्रेजों की पुरानी प्रेसीडेंसी रही थी, वहां इस तरह के क्लब बनाए गए थे।

आज भी उन जगहों पर आम भारतीयों की बराबर पहुंच नहीं है। सरकार को इन सभी शहरों में समीक्षा करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सरकार को तुरंत अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ानी चाहिए। आरएलडी नेता के इस बयान से दिल्ली की राजनीति गरमा गई है।

अब जानिए क्या है इस खबर का बैकग्राउंड

नई दिल्ली के सफदरजंग रोड पर प्रधानमंत्री आवास क्षेत्र के पास स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास बहुत पुराना है। इसकी शुरुआत वर्ष 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। तब इसे इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से जाना जाता था।

आजादी के बाद बदला नाम

आजादी मिलने के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया था। भूमि एवं विकास कार्यालय ने 22 मई को एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को एक बड़ा आदेश दिया है।

5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश

लुटियंस दिल्ली स्थित 27.3 एकड़ के इस पूरे परिसर को आगामी 5 जून तक खाली करने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में सार्वजनिक उद्देश्य और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जमीन वापस लेने की बात कही गई है।

मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट

इस बीच दिल्ली जिमखाना क्लब ने सरकार के इस बेदखली आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है। ऐसे में इस पूरे विवादित मामले पर अब सभी की निगाहें अदालत के आने वाले बड़े फैसले पर टिकी हुई हैं।

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