अहमदाबाद में कथित अवैध घुसपैठ के खिलाफ पुलिस ने व्यापक अभियान चलाते हुए 100 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों ने देर रात विशेष तलाशी अभियान चलाया, जिसमें अब तक 131 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में किए जाने की बात सामने आई है। वहीं करीब 160 अन्य संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ जारी है और उनके दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हिरासत में लिए गए लोगों की वास्तविक नागरिकता और कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान कई लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद के चंदोला, गुलाबनगर, खोदियारनगर और आसपास के क्षेत्रों में यह अभियान चलाया गया, जहां लंबे समय से अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की सूचनाएं प्रशासन को मिल रही थीं। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित लोग कानूनी रूप से भारत में रह रहे हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका भी सामने आई है, जिसे लेकर अलग से जांच की जा रही है।
हिरासत में लिए गए लोगों को पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच कार्यालय ले जाया गया है, जहां उनकी पहचान, भारत में प्रवेश के तरीके और स्थानीय संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या किसी स्थानीय नेटवर्क ने कथित तौर पर इन लोगों को रहने की सुविधा, रोजगार या पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए। इसके साथ ही नकली पहचान पत्र तैयार करने वाले गिरोहों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी संगठित नेटवर्क की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गुजरात में पिछले कुछ समय से कथित अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के मामलों को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इससे पहले भी अहमदाबाद, सूरत और अन्य शहरों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए तलाशी अभियान चलाए गए थे। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क पर रोक लगाने के उद्देश्य से ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या कानूनी स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच प्रक्रिया पूरी होने और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही निकाला जाएगा।




