योगी कैबिनेट ने खोला विकास का पिटारा: 28 प्रस्ताव पास, कई योजनाओं को मिली मंजूरी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में कुल 28 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन प्रस्तावों का संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय विकास, निवेश, प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों से है। बैठक का सबसे चर्चित फैसला शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद नगर का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ करने का रहा। सरकार का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अब आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक औपचारिकताओं के अनुरूप पूरी की जाएगी।

कैबिनेट ने प्रदेश में उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई स्टार्टअप नीति को भी मंजूरी दी। नई नीति के तहत स्टार्टअप इकाइयों को वित्तीय सहायता, इन्क्यूबेशन, तकनीकी सहयोग और निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।

बैठक में होमगार्ड जवानों और उनके आश्रित परिवारों के लिए भी बड़ा निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने लगभग 1.60 लाख होमगार्ड कर्मियों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए दुर्घटना बीमा संबंधी प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।

उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी सरकार ने विशेष जोर दिया। कैबिनेट ने विभिन्न जिलों में विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों, गोरखपुर में 100 बेड के अस्पताल के लिए भूमि उपलब्ध कराने, वाराणसी रोपवे परियोजना हेतु भूमि हस्तांतरण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन के संचालन एवं रखरखाव से संबंधित नीति को मंजूरी दी। इन निर्णयों का उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदेश के बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास करना है।

बैठक में वित्तीय और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ लेखा परीक्षा सेवा के वेतन संबंधी सिफारिशों को मंजूरी देने के साथ-साथ नगर निकायों के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने तथा विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन के प्रस्ताव भी पारित किए गए। सरकार का कहना है कि इन कदमों से स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी, विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकेगी।

सरकार के अनुसार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत सभी 28 प्रस्ताव प्रदेश में निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सुशासन को नई दिशा देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। इन फैसलों से न केवल आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को आर्थिक और सामाजिक विकास के नए चरण की ओर ले जाने में भी महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

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