गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और शासन शैली पर केंद्रित पुस्तक ‘Modified Governance: From Ancient Traditions to Citizen-Centric Administration’ का विमोचन किया गया। इस पुस्तक के लेखक भारतीय रेलवे के आईआरएसएस अधिकारी प्रेम शंकर झा हैं। पुस्तक में नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राजनीतिक सफर की शुरुआत से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनकी भूमिका तक की करीब 25 वर्षों की यात्रा को शासन और प्रशासन के नजरिए से समझने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में बताया गया है कि नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार कई चुनावों में सफलता हासिल की। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करते हुए प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी वे प्रधानमंत्री बने रहे। पुस्तक में इसी यात्रा को राजनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ नेतृत्व और प्रशासनिक दृष्टिकोण के संदर्भ में देखा गया है।
‘Modified Governance’ का केंद्रीय विचार नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था है। पुस्तक में इस बात पर चर्चा की गई है कि आधुनिक समय में सरकार और आम नागरिक के बीच संबंध किस तरह बदले हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे पहलुओं को शासन में बदलाव से जोड़कर देखा गया है। लेखक ने पारंपरिक भारतीय शासन अवधारणाओं और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है।
पुस्तक में मोदी सरकार के दौरान लागू की गई विभिन्न योजनाओं और नीतियों का भी उल्लेख किया गया है। जनधन योजना, आधार आधारित सेवाएं, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को नागरिकों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में यह समझाने की कोशिश की गई है कि कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों को बैंकिंग, आवास, स्वास्थ्य, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ना भी है।
शासन व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को भी पुस्तक में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बदला है। ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल भुगतान और डेटा आधारित प्रशासन को आधुनिक शासन प्रणाली के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में देखा गया है। लेखक ने प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल को पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार से जोड़कर समझाया है।
पुस्तक में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के विकास पर भी चर्चा की गई है। सड़क, रेलवे, रेलवे विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों के विकास जैसी पहलों को देश की आर्थिक गतिविधियों और बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है। इसी संदर्भ में बुनियादी ढांचे को केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि व्यापार, रोजगार और नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने वाला माध्यम बताया गया है।
आर्थिक क्षेत्र में हुए बदलावों को भी पुस्तक के विश्लेषण का हिस्सा बनाया गया है। जीएसटी, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश जैसी पहलों को अर्थव्यवस्था और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों के रूप में देखा गया है। आत्मनिर्भरता की अवधारणा को भी केवल आयात कम करने तक सीमित न रखकर देश में महत्वपूर्ण तकनीकों और उत्पादन क्षमताओं को विकसित करने से जोड़ा गया है।
पुस्तक में किसानों, महिलाओं और युवाओं से जुड़ी नीतियों का भी उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी, स्टार्टअप इंडिया और कौशल विकास जैसी पहलों को आर्थिक भागीदारी और अवसरों के विस्तार के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने इन योजनाओं के माध्यम से विभिन्न वर्गों को सरकारी सहायता के साथ आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की है।
‘Modified Governance’ में भारत की वैश्विक भूमिका और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों को भी जगह दी गई है। भारत की अंतरराष्ट्रीय सक्रियता, जी-20 की अध्यक्षता और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के विकास का भी उल्लेख किया गया है। पुस्तक में इन पहलुओं को भारत की विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान के व्यापक संदर्भ में देखने की कोशिश की गई है।
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष ‘जननायक’ और ‘राष्ट्रनायक’ की अवधारणाओं के बीच अंतर को लेकर है। इसमें यह विचार रखा गया है कि किसी नेता का मूल्यांकन केवल उसकी चुनावी लोकप्रियता से नहीं किया जा सकता। नेतृत्व की व्यापकता को समझने के लिए उसके प्रशासनिक फैसलों, नीतियों, शासन शैली और राष्ट्रीय स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को भी देखना आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का विश्लेषण पुस्तक में किया गया है।
वडनगर में पुस्तक का विमोचन होने के कारण इस आयोजन का विशेष महत्व भी है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और शुरुआती राजनीतिक-सामाजिक सफर से जुड़ा प्रमुख स्थान है। पुस्तक के आमंत्रण में ‘सुशासन से समृद्ध भारत की ओर’ संदेश को प्रमुखता दी गई है। यह संदेश पुस्तक के मुख्य विषय—सुशासन, प्रशासनिक बदलाव और नागरिक-केंद्रित व्यवस्था—से सीधे जुड़ता है।
कुल मिलाकर, ‘Modified Governance’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब 25 वर्षों के राजनीतिक सफर को शासन, प्रशासन और नेतृत्व के नजरिए से प्रस्तुत करने वाली पुस्तक है। लेखक ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की शुरुआत से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उनकी भूमिका तक की यात्रा को विभिन्न नीतियों, योजनाओं, प्रशासनिक बदलावों और नेतृत्व शैली के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया है। पुस्तक का विमोचन वडनगर में होना इसे मोदी के राजनीतिक सफर और शासन व्यवस्था पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण प्रकाशन के रूप में सामने लाता है।




