दिल्ली पुलिस ने किया एक बड़ा खुलासा जहाँ एक फर्जी डिग्री गिरोह सक्रिय था और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।दिल्ली–केंद्रीय ज़ोन की साइबर ब्रांच ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन फर्जी शैक्षणिक डिग्रियाँ बेच रहा था। आपको बता दे की गिरोह की शुरुआत तब उजागर हुई, जब एक गो-गोवा स्थित सर्विस कर्मचारी, जो गुड़गांव की आईटी कंपनी में 6–7 वर्षों से संविदा कर्मचारी था, को स्थायी किया जाना था। लेकिन कंपनी ने उसकी स्नातक डिग्री मांगी—जिसके पास केवल मार्कशीट थी।इस समस्या को लेकर उसके मैनेजर ने उसकी मदद के लिए कपिल झाकर (34) का नंबर दिया, जो “डिग्री निकलवाने” की पेशकश करता था।
झाकर ने पहले ₹25–30 हज़ार की मांग की, लेकिन बाद में बहानों से कुल ₹1.55 लाख+ वसूल लिए। अंत में एक बिना हस्ताक्षर वाली BA डिग्री भेजी, जिसे कंपनी ने जाँचा और अस्वीकार कर दिया।जब पीड़ित ने झाकर से संपर्क किया, तो 20 मार्च, 2025 को उसने उसे ब्लॉक कर दिया और FIR दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और फोन लोकेशन के ज़रिए हरियाणा के भिवानी नगर से झाकर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में झाकर ने सहयोगी की पहचान की—दमिनी शर्मा (33), जिसे कड़कड़डूमा इलाके से पकड़ा गया। उसके पास से बरामद हुए चार मोबाइल, सात सिम कार्ड और सैकड़ों डिजिटल फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट। DCP (Central) निधान वल्सन ने बताया—’ये गिरोह कई विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्रियाँ बना रहा था। प्रारंभिक जांच से पता चला कि उन्होंने भोले-भाले लोगों को निशाना बनाकर ये फर्जी प्रमाणपत्र बेचे। आगे अन्य आरोपियों और पीड़ितों की पहचान चल रही है।
दिल्ली पुलिस की साइबर टीम फर्जी डिग्री गिरोह की तह तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। अभी भी जांच जारी है, और पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किंतु भी डिजिटल या सोशल मीडिया पर किसी एजेंट पर विश्वास न करें—हर तरह का डिग्री/सर्टिफिकेट सीधे संबंधित यूनिवर्सिटी से ही सत्यापित कराएँ।




