ईरान–इजरायल जंग को लेकर पुतिन का बड़ा बयान

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 19 जून 2025 को सौतेदार बयान दिए, जो ईरान–इज़राइल जंग को लेकर काफी महत्वपूर्ण हैं।
पुतिन ने यह साफ़ कर दिया कि वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को किसी भी तरह के अमेरिकी–इजरायली निशाने से जोड़ने पर चर्चा नहीं करना चाहते। उन्होंने ये भी कहा,कि इस संघर्ष का समाधान राजनीतिक व कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए, जिसे उन्होंने “हर किसी के लिए सही विकल्प” बताया। आपको बता दे की पुतिन ने इज़राइल के हवाई हमलों को यूएन चार्टर का उल्लंघन बताया, और कहा कि कोई सैन्य समाधान कारगर नहीं होगा। पुतिन का बयान मायने इसलिए रखता है पुतिन प्रयास कर रहे हैं खुद को एक तटस्थ शांति निर्माता के रूप में पेश करने की, चाहे यूक्रेन में भारत-पाकिस्तान भूमिका की आलोचना हो या चीन के साथ आर्थिक गठजोड़ हो।रूस ईरान के परमाणु संयंत्रों में सहयोग जारी रखना चाहता है, जो इसे मध्य-पूर्व में अपनी दखलंदाज़ी बनाए रखने में मदद करता है। वही अमेरिका को सीधे हस्तक्षेप से रोकने की कोशिश की जा रही है, ताकि यूएस और इज़राइल की सैन्य संभावित कार्रवाइयों का रास्ता न खुल सके। अगर अमेरिका ईरान पर हमला करने से बाज नहीं आता, तो रूस और चीन मिलकर उसे कूटनीतिक मोर्चे पर सामना करेंगे।
रूस की मध्यस्थता की पेशकश अभी तक किसी बड़े फल की उम्मीद नहीं जग ला रही; लेकिन यह उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है जो यूक्रेन संकट में अमेरिकी दमन के बदले कुछ आर्थिक या राजनयिक रियायत लाभ कमाए।ईरान और इजराइल दोनों को बातचीत की ओर प्रेरित करेंगे; कोई तीसरा पहलकर्ता उठकर शांति वार्ता शुरू कर सकता है।

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