लखनऊ में बस संचालकों के साथ अहम बैठक – सड़क सुरक्षा, परमिट उल्लंघन, ओवरलोडिंग और फिटनेस पर परिवहन आयुक्त का सख्त संदेश

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आज 27 जून 2025 को परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश श्री ब्रजेश नारायण सिंह की अध्यक्षता में लखनऊ में परिवहन विभाग और बस संचालकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अपर परिवहन आयुक्त (राजस्व) श्री ए.के. विश्वकर्मा, अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) श्री संजय सिंह, अपर परिवहन आयुक्त (सड़क सुरक्षा) श्री मयंक ज्योति, राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव श्री सगीर अहमद अंसारी, उप परिवहन आयुक्त (लखनऊ क्षेत्र) श्री राधेश्याम, तथा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) श्री प्रभात पांडे मौजूद रहे।

बैठक का उद्देश्य हाल के बस हादसों, परमिट शर्तों के उल्लंघन और चालक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर चर्चा करना था। साथ ही, निजी बस अड्डों की स्थापना और यातायात नियमों के कड़ाई से पालन को लेकर सरकार की नई योजनाओं की जानकारी साझा की गई।

परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि माननीय मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में 50% तक की कमी लाई जाए। इसके लिए विभाग द्वारा सख्त प्रवर्तन और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। बस संगठनों को बताया गया कि हाल के कई हादसों के पीछे चालक की थकान, तेज गति, वाहन की खराब फिटनेस और नियमों की अनदेखी मुख्य कारण रहे हैं।

मुख्य मुद्दे जिन पर जोर दिया गया:

1. ओवरलोडिंग और लंबित चालान:
कई वाहनों पर दर्जनों चालान लंबित हैं, जो दुर्घटना की स्थिति में कानूनी स्थिति को और जटिल बना देते हैं। वाहन मालिकों से आग्रह किया गया कि वे अपने चालान शीघ्र निपटाएं ताकि प्रवर्तन कार्रवाई से बचा जा सके।

2. स्कूल वाहनों की सुरक्षा:
स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन स्कूल वाहनों की फिटनेस प्रमाण-पत्र मान्य नहीं है, उन्हें किसी भी हाल में संचालन की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए एक विशेष प्रवर्तन अभियान एक माह तक चलाया जा रहा है।

3. परमिट शर्तों का उल्लंघन – अनाधिकृत सवारियां:
यह पाया गया है कि कई कांट्रैक्ट कैरिज वाहन स्टेज कैरिज की तरह जगह-जगह सवारी उठा रहे हैं, जो परमिट की शर्तों का खुला उल्लंघन है। ऐसे मामलों में परमिट निलंबन या रद्दीकरण की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की प्रमुख पहलें:

  • (A) निजी बस अड्डों की स्थापना को बढ़ावा देने हेतु नीति अधिसूचित की गई है, ताकि सड़क किनारे बसों की अनियंत्रित रुकावट से होने वाले हादसों को रोका जा सके।

  • (B) सभी लंबी दूरी की बसों में दो चालकों की अनिवार्यता लागू की गई है, जिससे थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।

  • (C) एक संरचित चालक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है, जिससे सुरक्षा और पेशेवर दक्षता में सुधार हो सके।

परिवहन आयुक्त ने कहा कि सड़क हादसों को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का पालन ही इसका एकमात्र समाधान है। उन्होंने परिवहन संगठनों से नियमों के प्रति सजगता और पेशेवर रवैया अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, यह आश्वासन भी दिया कि विभाग पारदर्शी, पेशेवर और समाधान-प्रधान तरीके से कार्य करेगा, यदि वाहन मालिक व चालक भी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं।

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