प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक की अलंद विधानसभा सीट पर कांग्रेस समर्थकों के लगभग 6,000 वोट जानबूझकर हटाए गए। राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी’ करार देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया एक केंद्रीकृत सॉफ़्टवेयर के माध्यम से की गई थी और इसमें बाहरी राज्यों के मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई विशेष रूप से दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ की गई, जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस को वोट देते हैं।
राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर यह भी आरोप लगाया कि वे ‘वोट चोरों’ को संरक्षण दे रहे हैं और भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वालों का साथ दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कर्नाटक पुलिस की अपराध जांच विभाग (CID) ने पिछले 18 महीनों में चुनाव आयोग को 18 पत्र भेजे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। राहुल गांधी ने इसे एक ‘केंद्रीकृत साजिश’ करार दिया और कहा कि इसमें बड़े पैमाने पर संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
अलंद के उदाहरण का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने बताया कि वहां एक बूथ लेवल अधिकारी ने देखा कि उनके चाचा का वोट हटाया गया है। जब उन्होंने पड़ोसी से पूछा तो उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इससे स्पष्ट हुआ कि किसी अन्य शक्ति ने चुनाव प्रक्रिया को हाईजैक कर वोट हटाए। उन्होंने बताया कि यह सब आवेदन सॉफ़्टवेयर के माध्यम से किया गया और इसमें बाहरी राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी मतदाता सूची में गड़बड़ी की गई। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भी कांग्रेस समर्थकों के वोट जानबूझकर हटाए गए हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब मांगा।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को ‘बिना आधार’ बताते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि ऑनलाइन वोट हटाना संभव नहीं है और राहुल गांधी को सात दिनों के भीतर शपथपत्र देने या सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का निर्देश दिया। यदि ऐसा नहीं होता है, तो आयोग इन आरोपों को निराधार मानते हुए कार्रवाई करेगा।
राहुल गांधी के इन आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और यह मामला आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। अब यह देखना बाकी है कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।




