मुंबई की एक विशेष अदालत में गुरुवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी और यस बैंक के पूर्व सह-संस्थापक राणा कपूर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला उन निवेशों से जुड़ा है जो 2017 में यस बैंक द्वारा अंबानी समूह की कंपनियों में किए गए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन निवेशों की आड़ में बैंक को लगभग ₹2,796 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया।
सीबीआई की ओर से दायर दस्तावेजों में कहा गया है कि राणा कपूर ने अपने कार्यकाल के दौरान रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) जैसी अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADA Group) की कंपनियों में बड़े निवेश को मंजूरी दी। खास बात यह है कि उस समय कई रेटिंग एजेंसियां पहले ही इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति को लेकर सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी कर चुकी थीं। इसके बावजूद निवेश किए गए और बाद में धन को जटिल कॉरपोरेट संरचनाओं और परस्पर जुड़ी कंपनियों के माध्यम से बाहर निकाल लिया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन सौदों के एवज में राणा कपूर और उनके परिवार को लाभ पहुंचाया गया। कपूर की पत्नी बिंदु कपूर और बेटियाँ राधा तथा रोशनी कपूर से जुड़ी कंपनियों को रियायती दर पर ऋण और अन्य कारोबारी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। इस कथित मिलीभगत के चलते कई कंपनियाँ आरोपपत्र में नामजद हुई हैं, जिनमें Imagine Estate Pvt Ltd, Bliss House Pvt Ltd, Imagine Habitat, Imagine Residence और Morgan Credits Pvt Ltd शामिल हैं।
सीबीआई का कहना है कि इन सौदों में पारदर्शिता की भारी कमी रही और जानबूझकर जोखिमपूर्ण कंपनियों को प्राथमिकता दी गई। इससे न केवल बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ बल्कि हजारों करोड़ की सार्वजनिक पूंजी पर भी खतरा उत्पन्न हुआ। मामले को IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरोपपत्र निजी उद्योग जगत और बैंकिंग संस्थानों के बीच संबंधों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह मामला बताता है कि अगर निवेश निर्णय पारदर्शिता और जोखिम आकलन की कसौटी पर खरे नहीं उतरते तो इससे बैंकों और देश की वित्तीय व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
फिलहाल अदालत में सुनवाई शुरू होगी, जहाँ आरोपियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यह मामला लंबा चल सकता है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में गवाह, वित्तीय दस्तावेज़ और बैंकिंग रिकॉर्ड शामिल होंगे। वहीं, अनिल अंबानी और ADA समूह की ओर से इस आरोपपत्र पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।




