भारत–कनाडा संबंधों में नई दिशा: खालिस्तानी संगठनों पर कनाडा की सख्ती, भारत ने सराहा कदम

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भारत और कनाडा के बीच हाल के महीनों में तेजी से बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियों के बीच एक बड़ा कदम तब सामने आया जब कनाडा सरकार ने कई खालिस्तानी समर्थक और अपराधी संगठनों को अपनी आतंकवादी सूची में शामिल कर लिया। इस कार्रवाई को दोनों देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग और चरमपंथ विरोधी प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। कनाडा ने हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह सहित कुछ अन्य नेटवर्क को “आतंकी संगठन” घोषित किया है। इस निर्णय के बाद इन संगठनों की संपत्तियों को फ्रीज़ करने, उनकी वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और उनसे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जानकारों के अनुसार, कनाडा की इस सख्ती का सीधा असर उन खालिस्तानी तत्वों पर पड़ेगा जो लंबे समय से प्रवासी सिख समुदाय के भीतर सक्रिय हैं और भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने की कोशिश करते रहे हैं। इनमें कुछ संगठन पहले भी कनाडाई रिपोर्टों में संदिग्ध फंडिंग और उकसावे से जुड़ी गतिविधियों के लिए चिन्हित हो चुके हैं, जैसे बाबर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन। हाल में ओन्टारियो के एक सिनेमा हॉल में हुई आगजनी और गोलीबारी जैसी घटनाओं ने भी इस विषय को और गंभीर बना दिया, जिसके चलते कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने अपने कदम तेज किए हैं।

कनाडा सरकार का कहना है कि यह कदम देश के भीतर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार के तहत यह संदेश स्पष्ट है कि कनाडा किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों या उग्रवादी विचारधाराओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, भारत सरकार ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का सकारात्मक संकेत बताया है। नई दिल्ली ने कहा है कि वह विदेशों में सक्रिय किसी भी भारत-विरोधी संगठन या व्यक्ति की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखेगी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा का यह निर्णय भारत–कनाडा संबंधों में नई ऊर्जा लेकर आएगा। पिछले कुछ वर्षों में खालिस्तानी गतिविधियों के चलते दोनों देशों के रिश्ते कई बार तनावपूर्ण हुए थे, लेकिन अब जब ओटावा स्वयं इन तत्वों पर कार्रवाई कर रहा है, तो इससे न केवल प्रवासी समुदाय में सकारात्मक माहौल बनेगा बल्कि सुरक्षा सहयोग भी मजबूत होगा। यह कदम दोनों देशों के लिए एक साझा मंच तैयार करता है, जहां आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जा सके।

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