सुप्रीम कोर्ट में आज एक असामान्य और तनावपूर्ण घटना देखने को मिली जब एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवाई पर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह घटना उस समय हुई जब CJI की अध्यक्षता वाली पीठ कुछ मामलों की सुनवाई कर रही थी। वकील ने यह कदम CJI के हालिया बयान “अपने देवता से पूछो” के विरोध में उठाया, जो उन्होंने मध्य प्रदेश के खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्निर्माण से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया था।
सुनवाई के दौरान वकील अचानक पीठ के पास पहुंचा और अपना जूता फेंकने का प्रयास किया। इसके साथ ही उसने “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारे भी लगाए। हालांकि, कोर्ट में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए वकील को पकड़ लिया और उसे बाहर कर दिया। इस अप्रत्याशित घटना के बावजूद CJI गवाई ने पूरी शांति और संयम बनाए रखा और कहा, “ऐसी घटनाओं से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम विचलित नहीं होंगे।” उनका यह बयान यह दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के व्यवधान से न्यायपालिका प्रभावित नहीं होती।
इस घटना की पृष्ठभूमि CJI के उस बयान से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति के पुनर्निर्माण से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा था कि अब अपने देवता से पूछो और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अनुमति के अनुसार कार्य करें। उनके इस बयान को कुछ धार्मिक समूहों ने आपत्तिजनक माना, जिसके विरोध स्वरूप वकील ने यह कदम उठाया।
साथ ही, इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। यद्यपि सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता से कार्रवाई की, यह दिखाता है कि संवेदनशील मुद्दों पर बढ़ते विरोध के कारण कोर्ट परिसर में सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यवधान स्वीकार नहीं किया जाएगा और CJI गवाई की शांतिपूर्ण और दृढ़ प्रतिक्रिया ने यह सिद्ध कर दिया कि न्यायपालिका अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में अनुशासन और सुरक्षा की महत्ता को रेखांकित किया और यह दिखाया कि संवेदनशील मामलों पर न्यायिक प्रतिक्रिया हमेशा संतुलित और विचारशील होती है।




