नोबेल शांति पुरस्कार 2025 के विजेता का ऐलान शुक्रवार, 10 अक्टूबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से किया जाएगा। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी सुबह 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस वर्ष के पुरस्कार विजेता या विजेताओं के नाम की घोषणा करेगी। इस आयोजन को नोबेल की आधिकारिक वेबसाइट और विभिन्न वैश्विक समाचार माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरी दुनिया की निगाहें इस प्रतिष्ठित सम्मान पर टिकी हैं, जिसे मानवता, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने वाले कार्यों के लिए दिया जाता है।
इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है, जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संगठन शामिल हैं। हालांकि, नोबेल कमेटी पारंपरिक रूप से इन नामों का खुलासा नहीं करती और पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय रखा जाता है। जो नाम मीडिया में सामने आते हैं, वे अधिकतर अनुमानों, बेटिंग मार्केट्स और नामांककों के बयानों पर आधारित होते हैं।
मीडिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय बेटिंग वेबसाइटों के अनुसार, इस बार कई नामों को प्रमुख दावेदारों की सूची में रखा जा रहा है। इनमें सूडान की “इमरजेंसी रेस्पॉन्स रूम्स”, रूस के विपक्षी नेता अलेक्सेई नवालनी की पत्नी यूलिया नवाल्नाया, अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (MSF), संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA), पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, भूमध्य सागर में शरणार्थियों को बचाने वाले संगठन, और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जैसे नाम चर्चा में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन उम्मीदवारों के कार्य वैश्विक शांति और मानवीय सहायता से जुड़े हैं, जो नोबेल के मूल उद्देश्यों के अनुरूप हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इस बार चर्चा में इसलिए है क्योंकि उनके समर्थकों ने हाल के महीनों में सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय बेटिंग साइटों पर उन्हें प्रमुख उम्मीदवार बताया है। ट्रम्प ने खुद भी यह दावा किया है कि उन्होंने मध्य पूर्व में शांति समझौतों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई थी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नोबेल कमेटी राजनीतिक प्रभाव से दूर रहकर निर्णय लेती है और इसीलिए ट्रम्प की वास्तविक संभावना सीमित मानी जा रही है। कई विश्लेषकों के अनुसार, इस पुरस्कार का झुकाव अक्सर उन व्यक्तियों या संगठनों की ओर रहता है जिन्होंने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय राहत, मध्यस्थता या शांति निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
बेटिंग मार्केट्स और विशेषज्ञों की राय में काफी अंतर देखा जा रहा है। जहां कुछ प्लेटफॉर्म्स पर ट्रम्प या नवाल्नाया को बढ़त दी जा रही है, वहीं कई विशेषज्ञ सूडान की आपात प्रतिक्रिया टीम या भूमध्य सागर में शरणार्थियों की सहायता करने वाले समूहों को अधिक उपयुक्त मानते हैं। इन संगठनों ने युद्धग्रस्त और संकटग्रस्त क्षेत्रों में सक्रिय रहकर हजारों लोगों की जान बचाई है। नोबेल कमेटी प्रायः उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता देती है जो राष्ट्रों के बीच संवाद, मानवीय सहायता और शांति के स्थायी प्रयासों से जुड़े हों।
नोबेल शांति पुरस्कार का औपचारिक समारोह 10 दिसंबर 2025 को ओस्लो में आयोजित किया जाएगा, जो अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि भी है। विजेता की घोषणा के बाद विश्वभर के नेता, संस्थाएं और मीडिया इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्ष भी विश्व राजनीति और संघर्षों के बीच शांति की दिशा में एक नई उम्मीद लेकर आएगा।
अंततः, इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार किसके नाम जाएगा, यह कल ही स्पष्ट हो पाएगा। लेकिन यह तय है कि विजेता का कार्य मानवता, एकजुटता और वैश्विक भाईचारे का प्रतीक बनेगा। चाहे वह कोई नेता हो, कार्यकर्ता या संगठन — यह सम्मान हमेशा की तरह दुनिया को शांति के रास्ते पर प्रेरित करने वाला साबित होगा।




