कांकेर: 21 नक्सलियों का ‘लाल आतंक’ से मोहभंग, 18 हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले में सक्रिय 21 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के अनुसार, समर्पण करने वाले इन माओवादियों में 13 महिलाएं भी शामिल हैं। सभी ने अपने साथ 18 हथियार, जिनमें एके-47 राइफल, एसएलआर, देशी रायफल और अन्य हथियार शामिल हैं, सुरक्षा बलों के सामने जमा किए। यह आत्मसमर्पण पुलिस के ‘पूना मार्गेम – पुनर्वास के जरिए पुनः एकीकरण’ अभियान के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य माओवादी कार्यकर्ताओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन दिलाना है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन माओवादियों का समर्पण क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की बड़ी सफलता है। लगातार सघन तलाशी अभियानों, विकास योजनाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादियों का मनोबल टूट रहा है। कांकेर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कोशिशें इन युवाओं को समाज में फिर से जोड़ने पर केंद्रित हैं ताकि वे रोजगार और शिक्षा के माध्यम से एक नई जिंदगी शुरू कर सकें।

जानकारी के अनुसार, समर्पण करने वाले माओवादी विभिन्न नक्सली संगठनों से जुड़े थे और कई घटनाओं में शामिल रहे थे। पुलिस ने बताया कि इन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। समर्पण समारोह के दौरान अधिकारियों ने सभी माओवादियों का स्वागत किया और संविधान की प्रति भेंट कर उन्हें मुख्यधारा में शामिल होने का संदेश दिया।

बस्तर क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह आत्मसमर्पण अभियान सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल का नतीजा है। “यह केवल हथियार डालने की घटना नहीं, बल्कि उस सोच का बदलाव है जो वर्षों से हिंसा की राह पर चली आ रही थी,” अधिकारियों ने कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में और भी माओवादी मुख्यधारा में लौटेंगे, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की राह मजबूत होगी।

छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस समर्पण को बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की योजनाओं और पुलिस के जनसंपर्क कार्यक्रमों ने माओवादियों का भरोसा जीता है। अब प्रशासन का लक्ष्य है कि समर्पित नक्सलियों को जल्द से जल्द समाज में आत्मनिर्भर बनाया जाए ताकि वे दोबारा हिंसा की ओर न लौटें।

कांकेर में हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बस्तर के जंगलों में अब धीरे-धीरे ‘लाल आतंक’ की जगह शांति और विकास की सोच पनप रही है।

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