हवा में जहर: पंजाब में पराली जलाने का रिकॉर्ड टूटा, एक दिन में 283 मामले दर्ज

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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं ने इस सीज़न में नया रिकॉर्ड बना दिया है। हाल ही में एक ही दिन में 283 पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए, जो इस साल की अब तक की सबसे अधिक दैनिक संख्या है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से अब तक राज्य में कुल 1,216 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में भले ही थोड़ा कम दिखे, लेकिन हाल के दिनों में इसमें तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने सरकार और पर्यावरण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

सबसे अधिक पराली जलाने के मामले तਰਨतारन जिले से सामने आए हैं, जहां कुल 296 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद अमृतसर (173 मामले) और मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला संगरूर (170 मामले) तीसरे स्थान पर रहा। केवल एक ही दिन में संगरूर जिले से 79 नए मामले दर्ज हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य के दक्षिणी और मध्य भागों में पराली जलाने का संकट अधिक गंभीर है।

प्रशासन ने इस समस्या पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक कई किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं, साथ ही उनके भूमि रिकॉर्ड में “रेड एंट्री” की गई है और पर्यावरण जुर्माने भी लगाए गए हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने खेतों में निगरानी बढ़ा दी है ताकि दोबारा ऐसे मामले न हों। इसके अलावा, गांव-स्तर पर अवेयरनेस कैंप और वैकल्पिक निस्तारण तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन घटनाओं का सीधा असर राज्य की वायु गुणवत्ता (AQI) पर देखा जा रहा है। अमृतसर, लुधियाना, पटियाला और बठिंडा जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली का धुआं न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि यह लोगों के श्वसन तंत्र और हृदय रोगों के जोखिम को भी बढ़ा रहा है।

हालांकि, सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पराली जलाने के मामलों में कुछ कमी आई है, लेकिन अक्टूबर के आख़िरी सप्ताह में अचानक बढ़ोतरी ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों ने जल्द ही पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।

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