अवैध निवासियों और अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई के संकेत, पश्चिमी यूपी में योगी की सख्ती

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से मेरठ और मुजफ्फरनगर जिलों पर अपनी निगरानी को हाल के दिनों में काफी तेज किया है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान मिले फीडबैक और कानून-व्यवस्था से जुड़े इनपुट्स के आधार पर उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में सुरक्षा, आबकारी व्यवस्था और अवैध निवासियों की पहचान से संबंधित सभी गतिविधियाँ कड़ाई से संचालित की जाएं। मेरठ में प्रस्तावित मंडलीय समीक्षा और जिला स्तर पर अधिकारियों की बार-बार बैठकें इसी बढ़ी हुई सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में जिन मसलों पर विशेष फोकस किया है, उनमें ‘इनफिल्ट्रेटर्स’ यानी अवैध रूप से निवास कर रहे बांग्लादेशी या रोहिंग्या मूल के लोगों की पहचान और सूची तैयार करना प्रमुख है। इसके लिए स्थानीय निकायों और पुलिस को संयुक्त सर्वे करने, संदिग्ध स्थानों का सत्यापन बढ़ाने और कानूनी कार्रवाई के लिए आधारभूत प्रमाण जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इन जिलों में घनी आबादी और लगातार बढ़ते शहरी विस्तार के कारण अवैध प्रवासियों के छिपकर रहने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए निगरानी आवश्यक है।

साथ ही, पश्चिमी यूपी में अवैध शराब और तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए आबकारी विभाग को व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले कुछ महीनों में विभागीय रिपोर्टों में लगातार ऐसी गतिविधियों की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे जुड़ी छापेमारी की संख्या बढ़ाई गई है और जिलों को हर कार्रवाई की नियमित रिपोर्ट भी भेजनी होगी। दूसरी ओर, सुरक्षा व्यवस्था के मोर्चे पर भी सतर्कता इसलिए बढ़ाई गई है क्योंकि हाल में कुछ निरीक्षणों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन में खामियां सामने आई थीं। इसके बाद अधिकारियों को अपनी टीमों की तैनाती, गश्त और इंटेलिजेंस इनपुट्स को लेकर अधिक चौकस रहने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा में किसी भी चूक को गंभीरता से लिया जाएगा।

राजनीतिक और चुनावी दृष्टि से भी ये निर्देश महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्र में मतदाता सूची के सत्यापन के लिए चल रहे विशेष अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने पार्टी संगठनों और प्रशासन दोनों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि फर्जी या अपंजीकृत नामों को हटाया जाए और वास्तविक मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए। मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज रहती हैं, इसलिए मतदाता सूचियों की शुद्धता और क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन सभी वजहों के चलते इन जिलों में पुलिस, प्रशासनिक अमले और स्थानीय निकायों की गतिविधि अचानक तेज हो गई है। पहचान सत्यापन, आबकारी निरीक्षण, निगरानी और समीक्षा बैठकों की रफ्तार बढ़ने से स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा।

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