भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को हाल ही में एक ओपन लेटर लिखा गया है, जिसमें बलूचिस्तान के निर्वासित नेता मीर यार बलोच ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी नाराजगी और भारत के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। पत्र में उन्होंने जोर देकर कहा है, “पाकिस्तान को जड़ से उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ हैं।” मीर यार बलोच ने बलूचिस्तान में पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों का जिक्र करते हुए इसे बलूच जनता के संघर्ष का हिस्सा बताया।
पत्र में बलूच नेता ने भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान सरकार की उत्पीड़न नीतियों को समाप्त किया जाए, ताकि बलूचिस्तान में स्थायी शांति और स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चीन‑पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और चीन की संभावित सैन्य योजनाओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और भारत से सहयोग की अपील की।
इस पत्र में भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए नए वर्ष 2026 की शुभकामनाएँ भी दी गई हैं और अपने लोगों की ओर से समर्थन जताया गया है। हालांकि “पाकिस्तान को उखाड़ फेंको” जैसी अभिव्यक्तियाँ प्रतीकात्मक रूप में लिखी गई हैं और इसका उद्देश्य पाकिस्तान के खिलाफ हिंसा फैलाना नहीं बल्कि बलूचिस्तान के राजनीतिक संघर्ष और उत्पीड़न को उजागर करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह पत्र एक गैर‑राज्य स्तरीय अभिव्यक्ति है, लेकिन यह भारत‑पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नए विमर्श को जन्म दे सकता है। मीर यार बलोच द्वारा लिखा गया यह ओपन लेटर दर्शाता है कि बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष और राजनीतिक असंतोष के बीच भारत की भूमिका पर जोर देने का प्रयास किया गया है।




