ब्रसेल्स: यूरोपीय संघ (EU) ने रूस से ऊर्जा निर्भरता खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 2027 तक रूसी प्राकृतिक गैस के आयात पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले को EU के 27 सदस्य देशों की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे यह कानूनी रूप से बाध्यकारी बन गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से यूरोप लगातार रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा था और अब इस कदम के जरिए उस रणनीति पर अंतिम मुहर लगा दी गई है।
यूरोपीय संघ का यह निर्णय REPowerEU योजना का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य रूस से तेल, गैस और अन्य जीवाश्म ईंधनों के आयात को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। नए कानून के तहत रूसी गैस पर प्रतिबंध को क्रमिक रूप से लागू किया जाएगा ताकि ऊर्जा आपूर्ति में अचानक कोई संकट न पैदा हो। इसके अनुसार, नए गैस अनुबंधों पर पहले ही रोक लगाई जाएगी, जबकि पुराने समझौतों को सीमित समय के लिए छूट दी जाएगी।
नियमों के मुताबिक, 2026 के अंत तक रूसी LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के आयात को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा, जबकि पाइपलाइन के जरिए आने वाली रूसी गैस पर 2027 तक पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा। इस दौरान सदस्य देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की व्यवस्था करने और अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने का समय दिया गया है, ताकि उपभोक्ताओं और उद्योगों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।
यूरोपीय संघ का मानना है कि इस फैसले से वह भविष्य में ऊर्जा के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा। इसके लिए EU देश नवीकरणीय ऊर्जा, एलएनजी के नए आपूर्तिकर्ताओं और अन्य वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। साथ ही गैस भंडारण क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा दक्षता सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनी रहे।
राजनीतिक और भू-रणनीतिक दृष्टि से भी यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। यूरोपीय संघ लंबे समय से रूस पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह गैस आपूर्ति को राजनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। ऐसे में यह प्रतिबंध न सिर्फ आर्थिक बल्कि राजनीतिक संदेश भी देता है कि यूरोप अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्वतंत्र नीति अपनाने के लिए तैयार है।
हालांकि कुछ EU सदस्य देश, जो अब भी रूसी गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं, इस फैसले को लेकर आशंकाएं जता चुके हैं। इन देशों के लिए विशेष संक्रमण अवधि और वैकल्पिक योजनाओं पर काम करने की बात कही गई है। इसके बावजूद, यूरोपीय संघ का मानना है कि 2027 तक रूसी गैस से पूरी तरह अलग होना लंबे समय में उसकी ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक स्वतंत्रता और स्थिरता को मजबूत करेगा।




