मदर ऑफ ऑल डील्स: भारत-EU व्यापार समझौते से बदलेगा आर्थिक परिदृश्य

SHARE:

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच करीब 19 साल से चली आ रही बातचीत अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आज भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को लेकर बड़े फैसले की औपचारिक घोषणा करने जा रहे हैं। यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के आर्थिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसे दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक रूप से बेहद अहम बताया जा रहा है।

भारत-EU व्यापार समझौते पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी, लेकिन अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद और वैश्विक परिस्थितियों के चलते यह प्रक्रिया कई बार ठप हो गई। वर्ष 2022 में दोनों पक्षों ने दोबारा बातचीत को तेज किया, जिसके बाद बीते कुछ वर्षों में कई दौर की चर्चाओं के जरिए सहमति बनने की दिशा में ठोस प्रगति हुई। अब लगभग दो दशकों के इंतजार के बाद इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर सहमति बनने जा रही है।

इस समझौते के तहत भारत और EU के बीच टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करने, व्यापार को सरल बनाने और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर टेक्सटाइल, चमड़ा, दवाइयों, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, ज्वैलरी और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में व्यापार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। साथ ही सेवाओं और निवेश के क्षेत्र में भी दोनों पक्षों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, समझौते में कुछ संवेदनशील मुद्दों पर भी संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। उदाहरण के तौर पर, यूरोपीय संघ से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर भारत टैरिफ में चरणबद्ध कटौती पर सहमत हुआ है, जबकि EU ने भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में बेहतर पहुंच देने का भरोसा दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन में बदलाव के बीच भारत और EU एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरना चाहते हैं। यह डील न सिर्फ आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी देगी।

हालांकि आज समझौते पर सहमति और घोषणा होने की उम्मीद है, लेकिन इसके पूरी तरह लागू होने में अभी समय लग सकता है। समझौते के कानूनी मसौदे की समीक्षा, भारत में कैबिनेट की मंजूरी और यूरोपीय संसद की स्वीकृति के बाद ही इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। इसके बावजूद, आज होने वाला फैसला भारत-EU रिश्तों के इतिहास में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर साफ नजर आएगा।

Leave a Comment