नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के बजट सत्र की शुरुआत पर लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए देश की उपलब्धियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को विस्तार से रखा। अपने अभिभाषण में उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती, संसद की गरिमा और रचनात्मक चर्चा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि देश को दिशा देने का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है। राष्ट्रपति ने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक बहस करें, ताकि लोकतंत्र और अधिक सशक्त बन सके।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने बीते वर्षों में कृषि, उद्योग, विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह और मजबूत कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलों ने न केवल आर्थिक विकास को गति दी है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी आसान बनाया है।
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने युवाओं, महिलाओं और किसानों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं और सरकार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर निरंतर काम कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सामाजिक परिवर्तन का संकेत बताते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की सफलता का उल्लेख किया। साथ ही किसानों के हित में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार से देश का मानव संसाधन और मजबूत होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की।
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर भी राष्ट्रपति ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना समय की जरूरत है और इस दिशा में भारत वैश्विक स्तर पर अपनी जिम्मेदार भूमिका निभा रहा है। साथ ही उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को गंभीरता से सुना जा रहा है।
हालांकि राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान कुछ मुद्दों पर विपक्ष की ओर से नारेबाजी और हंगामा भी देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना भाषण पूरा किया। अपने अभिभाषण के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर देश को एकजुट होकर विकास, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।




