भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक बैठक में आम जनता और डिजिटल लेनदेन से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में MPC ने मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। रेपो रेट को यथावत रखने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों की EMI में न तो बढ़ोतरी होगी और न ही कमी। RBI का मानना है कि वर्तमान में महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक गतिविधियां स्थिर गति से आगे बढ़ रही हैं, ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखना संतुलित कदम है।
डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने की दिशा में MPC ने एक बड़ा फैसला लेते हुए UPI और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले फ्रॉड मामलों में उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का प्रावधान किया है। यदि किसी ग्राहक के साथ UPI लेनदेन के दौरान धोखाधड़ी होती है, तो तय नियमों के तहत उसे एक निश्चित सीमा तक मुआवजा मिलेगा। इस कदम का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन पर लोगों का भरोसा बढ़ाना और बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों पर अंकुश लगाना है। RBI ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा।
MPC ने अपने आकलन में यह भी कहा कि आने वाले समय में महंगाई के नियंत्रण में रहने की संभावना है। खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है और मौद्रिक नीतियां इस तरह बनाई जा रही हैं कि आर्थिक विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बना रहे। कुल मिलाकर, MPC के ये फैसले एक ओर जहां आम लोगों को ब्याज दरों के मोर्चे पर राहत देते हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।




